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टैक्स गुरू: कितना जरूरी है इंश्योरेंस

प्रकाशित Sat, 21, 2014 पर 13:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स का नाम सुनते ही हम परेशान हो जाते हैं कि पता नहीं क्या क्या करना होगा। लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपकी मदद करने के लिए आ गए हैं टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया और हम उनसे जानेंगे टैक्स से जुड़े आपके सभी सवालों के जवाब और बनाएंगे रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को आसान।


सवाल : भविष्य की प्लानिंग के लिए बीमा यानि इंश्योरेंस सबको लेना चाहिए, लेकिन कितना ले इंश्योरेंस?
  
सुभाष लखोटिया : सिर्फ इनकम टैक्स छूट के मकसद से लिया गया बीमा पर्याप्त नहीं है। इसलिए सुनिश्चित करें कि बीमा आपकी जरूरत के मुताबिक हों। अपने खर्चों और लाइफस्टाइल्स को ध्यान में रकहर बीमा लेना चाहिए। इतना बीमा लेना चाहिए कि आपके नहीं रहने पर परिवार चल सकें। बीमा लेते समय बढ़ती महंगाई को भी ध्यान में रखें।   


सवाल : भाई के बीमा पॉलिसीज से 14 लाख रुपये मिले हैं। क्या इस पर टैक्स लगेगा? 


सुभाष लखोटिया : दुर्घटना में हुई मौत के बाद बीमा से मिली रकम पर टैक्स नहीं लगता। बीमा से मिलने वाली पूरी रकम टैक्स फ्री होती है। अगर माताजी नॉमिनी है उन्हें बीमा राशि पर टैक्स नहीं देना होगा। माताजी वरिष्ठ नागरिक है और इसलिए 2.50 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगेगा। मिले हुए पैसे सोच-समझकर निवेश करें ताकि भविष्य में फायदा मिले और जरूरत होने पर पैसे काम आएं। 


सवाल : क्या दवा खर्च पर टैक्स छूट मिलेगी? 


सुभाष लखोटिया : मेडिकल अलाउंस की पूरी रकम पर टैक्स लगता है।  मेडिकल रीइंबर्समेंट पर सालाना 15,000 रुपये तक की छूट मिलती है। वहीं मेडिकल इंश्योरेंस पर सेक्शन 80डी के तहत छूट मिलेगी। परंतु दवा पर हुए खर्च के लिए सेक्शन 80डी के तहत आप टैक्स छूट नहीं पा सकते।  


सवाल : मेरे पास 3 इंश्योरेंस पॉलिसी है। तीसरी पॉलिसी लेते समय कंपनी को दूसरी पॉलिसीज की जानकारी नहीं दी। क्या क्लेम आसानी से मिलेगा?


सुभाष लखोटिया : एक कंपनी को दूसरी कंपनी में निवेश के बारे में बताना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर फॉर्म में जानकारी मांगी गई हो तो दूसरी पॉलिसी की जानकारी दें। आप अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी में निवेश कर सकते हैं।


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