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किससे बचें- जोखिम या घाटा

फायदेमंद निवेश रणनीति के मुताबिक अगर जोखिम लेकर अच्छे रिटर्न मिल रहे हों तो निवेश किया जा सकता है।
अपडेटेड Sep 18, 2010 पर 14:19  |  स्रोत : Hindi.in.com

18 सितंबर 2010

सीएनबीसी आवाज़




सबसे बेहतरीन निवेश वही है जिसमें कम जोखिम के साथ ज्यादा रिटर्न मिले। माना जाता है कि निवेशक जोखिम और रिटर्न को देखते हुए ही निवेश करते हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है।

फायदेमंद निवेश रणनीति के मुताबिक अगर जोखिम लेकर अच्छे रिटर्न मिल रहे हों तो निवेश किया जा सकता है। ज्यादातर निवेशक पैसा लगाते वक्त जोखिम से नहीं, बल्कि घाटे से बचना चाहते हैं।

घाटे से बचने की मंशा की वजह से हल्की गिरावट पर निवेशक बिकवाली करने लगते हैं। जबकि, गिरावट आने पर खरीदारी करके ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। वैसे ही, शेयरों की कीमतें में काफी उछाल आने के बाद निवेशक अपनी सारी पूंजी महंगे शेयर खरीदने में खर्च कर देते हैं।

देखा गया है कि घाटे से भी ज्यादा निवेशकों पछताना पसंद नहीं है। निवेश का मौका आने पर निवेशकों के पास दो ही विकल्प होते हैं- पैसा लगाएं या नहीं। अगर खरीदारी करने के बाद, शेयरों में हल्की सी गिरावट आती है, तो निवेशकों को पछतावा होने लगता है। अगर पैसा नहीं लगाते हैं, तो कीमतें बढ़ने पर मौका हाथ से निकलने का दुख मनाते हैं।

1999-2000 में जब तकनीकी शेयरों में जबर्दस्त उछाल आया था, तब कई निवेशकों ने अपने बैंक खाते खाली करके सारा पैसा आईटी शेयरों में लगा दिया। बाजार में सुधार आने पर लोगों ने घाटे पर बिकवाली की और फिर से बॉन्ड और बैंक में पैसा जमा करने लग गए। निवेशकों में ऐसा रुख कई बार देखा गया है।

ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ में निवेशक देखा-देखी में पैसा लगाते चले जातें हैं। लेकिन, गिरावट आने पर ये नहीं सोचते हैं कि मुझे बाकी लोगों से कम घाटा हुआ है। इस तरह से निवेशक पैसा बनाने की जगह पैसा गंवाते चले जाते हैं।

इस लेख के लेखक अमित त्रिवेदी कर्मयोग नॉलेज एकैडमी के मालिक हैं। उनसे amit@karmayog-knowledge.com पर संपर्क किया जा सकता है।