चुनौती को स्वीकारा: वित्त मंत्री

एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा वित्तीय घाटे की चुनौती स्वीकार करना ठीक समझा
अपडेटेड Jul 10, 2014 पर 20:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी टीवी18 की मैनेजिंग एडिटर शिरिन भान के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि खराब आर्थिक हालत में सत्ता संभाली है। उनके मुताबिक पिछले कुछ सालों में देश पर निवेशकों का भरोसा घटा था। इकोनॉमी की हालत काफी खराब थी। वित्त मंत्री ने कहा कि निवेशकों में भरोसा लौटाना जरूरी था। उन्हें बजट बनाने के लिए सिर्फ 45 दिन मिले हैं। अभी उन्होंने सिर्फ शुरुआत की है, अभी कई मुद्दों को सुलझाना बाकी है।


वित्त मंत्री के मुताबिक वित्त वर्ष 2015 के लिए तय किया गया 4.1 फीसदी के वित्तीय घाटे का आंकड़ा सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। अरुण जेटली ने साफ किया कि उन्हें पिछली सरकार पर आरोप लगाकर अनिश्चितता नहीं फैलानी थी। वो आर्थिक आंकड़ों पर शक करके निवेशकों का भरोसा और नहीं तोड़ना चाहते थे। इसलिए उन्होंने वित्तीय घाटे की चुनौती को स्वीकारना उचित समझा और पिछली बातें छोड़कर आगे का रोडमैप बनाने पर फोकस किया। वित्तीय घाटे को 5 फीसदी तक बढ़ाकर फिर आगे कम करना आसान है।


अरुण जेटली के मुताबिक मौजूदा बाजार में विनिवेश करना सही होगा। विनिवेश के लिए सरकारी कंपनियों की समीक्षा की जा रही है। साथ ही बैंक कैपिटलाइजेशन से बैंकों के पास ज्यादा पूंजी आएगी, जिससे वो अपना कारोबार बढ़ा पाएंगे। सब्सिडी कटौती पर खर्चों की कमेटी की रिपोर्ट जल्द आएगी। सब्सिडी घटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि कुछ तबकों को सब्सिडी की जरूरत है। फूड सिक्योरिटी, जमीन अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर राजनीति सहमति होना जरूरी है। पुरानी तारीख से टैक्स वसूलने का मुद्दा सीबीडीटी को सौंपा जाएगा और प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर काफी चर्चा की है। टैक्स विवादों को एक एक करके सुलझाया जाएगा।


वित्त मंत्री ने साफ किया जीएसटी लागू करना सरकार की प्राथमिकता है। जीएसटी पर राज्यों के साथ दो बार बैठक की जा चुकी है। जीएसटी मुआवजे के लिए पैसा जुटाना होगा। डिफेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई को बढ़ाकर 49 फीसदी करने पर अरुण जेटली ने कहा कि अभी के लिए इतना ही सही है। मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई पर पूरा विचार करके फैसला लिया जाएगा। डीटीसी की अभी समीक्षा अभी शुरू नहीं हुई है, इसलिए इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स के मामले पर पुर्नविचार का कोई इरादा नहीं है।


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