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बजट से म्यूचुअल फंड कंपनियों को झटका

सरकार ने इक्विटी फंड को छोड़कर बाकी सभी फंड पर लॉन्ग कैपिटल गेंस टैक्स दोगुना कर दिया है।
अपडेटेड Jul 11, 2014 पर 16:54  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बजट में म्युचुअल फंड सेक्टर को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने इक्विटी फंड को छोड़कर बाकी सभी फंड पर लॉन्ग कैपिटल गेंस टैक्स दोगुना कर दिया है। इस झटके के बाद म्यूचुअल फंड कंपनियां नए डेट फंड की लॉचिंग कैंसिल कर रही हैं।


एसबीआई म्यूचुअल फंड ने बजट के दिन ही अपने डेट फंड सीरीज ए को लॉन्च किया था लेकिन बजट आते ही उसने इस स्कीम को कैंसिल कर दिया है। इतना ही नहीं शुक्रवार को एक और स्कीम लॉन्च होने वाली थी उसे भी कैंसिल कर दिया गया। ये दोनों स्कीम फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान थीं। म्युचुअल फंड के मुताबिक कैपिटल गेन टैक्स बढ़ने के बाद अब एफएमपी बेचना बेहद मुश्किल हो जाएगा।


दरअसल वित्तमंत्री ने बजट में डेट फंड, लिक्विड फंड, गोल्ड फंड और इंटरनेशनल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 10 फीसदी से बढाकर 20 फीसदी कर दिया है। इतना ही नहीं अब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के लिए किसी एक म्यूचुअल फंड स्कीम कम से कम 3 साल तक पैसा लगाना होगा। यानी 3 साल से पहले पैसा निकाला तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा। ये शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से लगता है। यानी अगर आप 30 फीसदी के स्लैब में है तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स भी 30 फीसदी लगेगा।


यानी अब डेट फंड स्कीम में फायद उन्ही को होगा जो 10 फीसदी या टैक्स फ्री इनकम स्लैब में आते हैं। वित्त मंत्री का भी मानना है कि डेट फंड के पुराने टैक्स स्ट्रक्चर की वजह से बड़े निवेशक इसका इस्तेमाल आर्बिट्राज के लिए करते थे।


बजट में म्युचुअल फंड की डिविडेंड स्कीम पर भी टैक्स लगेगा। दरअसल वित्तमंत्री ने डिविडेंड स्कीमों पर लगने वाले टैक्स की गणना को बदल दिया है। इसके चलते डिविडेंड स्कीमों पर टैक्स 2.5 फीसदी से 3 फीसदी बढ़ जाएगा। यानि आपके हाथ में कम पैसा आएगा। यानी अब फिक्स्ड डिपॉजिट के बजाए डेट फंड में पैसा लगाने से आप ज्यादा टैक्स नहीं बचा पाएंगे।


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