Moneycontrol » समाचार » बजट प्रतिक्रियाएं

इकोनॉमी में बढ़ोतरी की उम्मीदः हर्ष गोयनका

आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा कि बजट में समाज के सभी वर्ग के लिए काम किया गया है।
अपडेटेड Jul 12, 2014 पर 12:16  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मोदी सरकार के पहले बजट पर अपनी राय देते खास मुलाकात में सीएनबीसी आवाज़ के संपादक संजय पुगलिया से आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा कि वित्त मंत्री का बजट काफी संतुलित रहा और बजट में समाज के सभी वर्ग के लिए काम किया गया है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है। साथ ही स्मार्ट सिटी का ऐलान काफी अहम है, जो गेम चेंजिंग साबित होगा। बजट में रोड और पोर्ट को महत्व दिया गया है जिससे इंफ्रा सेक्टर के लोग काफी खुश हैं।


हर्ष गोयनका का मानना है कि मोदी सरकार के पहले बजट से इकोनॉमी में बढ़ोतरी की उम्मीद बढ़ी है। बजट में ऑटो सेक्टर के लिए प्रस्तावित प्रावधानों से टायर सेक्टर को फायदा होगा, तो बजटीय ऐलानों से पावर सेक्टर की दिक्कतें सुलझेंगी। आईटी सेक्टर में रिफॉर्म से भी फायदा होगा। कुल मिलाकर बजट से इंडस्ट्री को नुकसान की आशंका नहीं है।


हर्ष गोयनका के मुताबिक बजट में वित्त मंत्री ने कई सारी मुश्किलें दूर करने की कोशिश की है। बजटीय प्रावधानों से देश में भारी मात्रा में एफडीआई आने की उम्मीद है, तो पीएसयू और बैंकों से भी खूब पैसा आएगा। गौरतलब है कि बजट बनाने के लिए वित्त मंत्री के पास समय काम था, लेकिन अगला बजट फाइनल जैसा होगा। वित्त मंत्री के लिए मुश्किलें ज्यादा थी, लेकिन वित्त मंत्री ने इकोनॉमी को दिशा देने की कोशिश की है।


हर्ष गोयनका ने कहा कि मोदी सरकार को गरीबों के लिए काम करना होगा। वहीं बजट में टैक्स छूट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बजट में मैन्युफैक्चरिंग के लिए अलाउंस भी अहम साबित होगा जिससे इस सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। दरअसल मजबूत सरकार से अब सेंटिमेंट सुधरा है, पर अच्छे दिन आने में अभी वक्त लगेगा। बजट में कई छोटी दिक्कतें दूर की गई हैं, और अब बिजनेस में आसानी से भी फर्क नजर आएगा। हालांकि पिछली तारीख से टैक्स को लेकर कोई सफाई नहीं आने से निराशा जरूर हुई है, क्योंकि रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स का मुद्दा अहम है। सरकार के लिए वोडाफोन का मुद्दा सुलझाना जरूरी है।


हर्ष गोयनका के मुताबिक बजटीय प्रावधानों से देश में निवेश की तुरंत बौछार नहीं होगी। लेकिन डिफेंस में 49 फीसदी एफडीआई पर्याप्त नहीं होगी, पर इंश्योरेंस में काफी निवेश आने की गुंजाइश है। मोदी सरकार ने बैंकों को मजबूत करने का काम किया है और अब कुछ पीएसयू बैंकों का विलय संभव है। उम्मीद है कि अब बैंक आसानी से कर्ज देंगे और बैंक इंफ्रा को फंडिंग शुरू करेंगे। साथ ही नई सरकार ने पावर में काफी गंभीरता के साथ काम शुरू किया है।


हर्ष गोयनका का कहना है कि बजट पर भारत में ही काफी हो-हल्ला होता है, लेकिन अब बजट की अहमियत घट रही है। दरअसल बजट में पॉलिसी की चीजें नहीं होनी चाहिए। पॉलिसी से जुड़ी चीजें के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए। बजट में स्किल डेवलपमेंट का विषय अहम रहा और अभ अगले 2 साल में काफी काम होने की उम्मीद है। सरकार को थोड़ा वक्त देना ही होगा और उम्मीद है कि सबकी भलाई के काम किए जाएंगे। लेबर रिफॉर्म काफी संवेदनशील है जिसके लिए सरकार की ओर से सबके साथ चर्चा करना जरूरी है।


वीडियो देखें