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बॉन्ड फंड निवेश के लिए आकर्षकः लियो पुरी

यूटीआई एमएफ के लियो पुरी के मुताबिक सरकार फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान के टैक्स पर दोबारा विचार कर सकती है।
अपडेटेड Jul 15, 2014 पर 19:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

बजट में सरकार ने कई सेक्टर्स को कड़वी दवा पिलाई है जिसमें से एक म्युचुअल फंड इंडस्ट्री भी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डेट म्युचुअल फंडों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है जिससे म्युचुअल फंड इंडस्ट्री काफी निराश है।


सीएनबीसी आवाज़ के बैंकिंग एडिटर प्रदीप पंड्या से खास बातचीत में यूटीआई म्युचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर लियो पुरी ने उम्मीद जताई है कि सरकार फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान के टैक्स पर दोबारा विचार कर सकती है। लियो पुरी के मुताबिक बजट से म्युचुअल फंड इंडस्ट्री निराश हुई है। हालांकि सरकार की ओर से रेट्रो टैक्स पर पुनर्विचार संभव है।


लियो पुरी का कहना है कि टैक्स के बावजूद बॉन्ड फंड निवेश के लिए काफी आकर्षक हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले इनकम फंड का प्रदर्शन बेहतर रहा है। 3 साल में देखें तो इनकम फंड में फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न मिलता है। म्युचुअल फंड में निवेश के 3 फायदे होते हैं, डाइवर्सिफिकेशन, लिक्विडिटी और वेरायटी भी होती है।


लियो पुरी का मानना है कि म्युचुअल फंड का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर रहा है और टैक्स को छोड़ दिया जाए तो फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर प्रदर्शन म्युचुअल फंडों का रहा है। लेकिन शॉर्ट टर्म स्कीम के लिए बैंकों से मुकाबला करना है तो म्युचुअल फंडों को और प्रोमोट करने की जरूरत है।


लियो पुरी ने बताया कि निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ने की सूरत में अब 3 साल के म्युचुअल फंड लाने पर जोर होगा, लेकिन 3 साल वाली एमएफ स्कीमों में ज्यादा रिटर्न संभव है। इस बदले हुए माहौल में निवेशकों को भी इक्विटी पर फोकस करना चाहिए। वहीं अब डेट फंडों को बंद करने की बजाय रीबैंलेंस करने पर जोर होगा और शायद अब डेट फंडों की अवधि लंबी हो जाएगी। साथ ही रिटायरमेंट प्लान लाने की भी योजना बनाई जा सकती है। रिटायरमेंट प्लान के आने से बहुत से लोग म्युचुअल फंड में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि रिटायरमेंट प्लान को लेकर भी अभी सफाई की जरूरत है। रिटायरमेंट प्लान में इक्विटी का हिस्सा 30-100 फीसदी तक हो सकता है।


लियो पुरी ने कहा कि डिविडेंट टैक्स बढ़ाने से निवेशकों में नकारात्मक संदेश गया है। लिहाजा बहुत सारे निवेशक डिविडेंड ऑप्शन से बाहर निकलने का फैसला कर सकते हैं। यूटीआई म्युचुअल फंड की ईटीएफ पर भी फोकस करने की योजना है इसके लिए सरकार के साथ मिलकर काम किया जाएगा। रिटेल निवेशकों के लिए एसआईपी और एसटीपी बेहतर ऑप्शन है। फंड हाउस का प्रदर्शन अच्छा नहीं है तो स्विच जरूर कर सकते हैं।


लियो पुरी के मुताबिक मौजूदा माहौल में लोगों को रिटर्न के बारे में सोचना चाहिए और टैक्स को बाद में सोचना चाहिए। युवा निवेशकों को इक्विटी में निवेश करना चाहिए और बॉन्ड फंड में भी निवेश कर सकते हैं। 18-24 महीने में फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न बॉन्ड फंड में संभव है। पिछले महीने से लोग म्युचुअल फंड में आना शुरू हुए हैं। लेकिन राजीव गांधी इक्विटी स्कीम ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई और सरकार इसकी समीक्षा कर सकती है। रिफॉर्म की गाड़ी पटरी पर आई तो इक्विटी बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है।


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