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म्युचुअल फंडः 3 साल के एफएमपी पर जोर

मोदी सरकार के पहले बजट से निराश म्युचुअल फंड इंडस्ट्री अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं।
अपडेटेड Jul 26, 2014 पर 10:51  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मोदी सरकार के पहले बजट से निराश म्युचुअल फंड इंडस्ट्री अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं। बजट में टैक्स के नियम बदलने के बाद अब म्युचुअल फंड कंपनियां 1 साल के बदले 3 साल की एफएमपी पर ही पूरा जोर लगा रही हैं। पिछले 10 दिनों में कंपनियों ने 8-10, 3 साल के एफएमपी लॉन्च किए हैं।


फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान म्युचुअल फंड कंपनियों की कैश मशीन रहा है। और वो इसे इतनी आसानी से छोड़ने वाली नहीं हैं। 1 साल के प्लान से टैक्स बेनिफिट खत्म हुआ तो कंपनियां फटाफट 3 साल के प्लान लॉन्च करने लगी हैं। पिछले 10 दिन में एचडीएफसी, आईसीआईसीआई प्रू, एलएंडटी, रिलायंस एमएफ, रेलीगेयर म्युचुअल फंड ने 3 साल के क्लोज एंडेड फिक्स्ड मैच्युरिटी प्लान लॉन्च किए हैं। यूटीआई म्युचुअल फंड ने तो 5 साल का एफएमपी भी लॉन्च किया है।


दरअसल 3 साल के एफएमपी पर टैक्स भले ही 20 फीसदी का है लेकिन इंडेक्सेशन का फायदा लेने के बाद ये अभी भी फिक्सड डिपॉजिट के मुकाबले काफी फायदेमंद है। बदले हालात में म्युचुअल फंड कंपनिया ऐसे निवेशकों को 3 साल के फंड में स्विच करने का विकल्प भी दे रही हैं जो बजट में बढ़े टैक्स के कारण एफएमपी नहीं बेचना चाहते हैं।


डेट फंड पर टैक्स बढ़ने का एक असर ये हुआ है कि अब कंपनियों ने आर्बिट्राज फंड को भी लपक लिया है। हाल ही में एक्सिस म्युचुअल फंड ने आर्बिट्राज फंड लॉन्च किया है। ये फंड बाजार में शेयरों की कीमतों में आए अंतर का फायदा उठाते हैं।


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