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टैक्स गुरु: सुलझाएं टैक्स से जुड़ी उलझन

टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया से जानते हैं आईटी विभाग से नोटिस मिलने पर करदाताओं को क्या करना चाहिए।
अपडेटेड Nov 06, 2014 पर 16:46  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आइए टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया से जानते हैं आईटी विभाग से नोटिस मिलने पर करदाताओं को क्या करना चाहिए। और साथ ही टैक्स गुरु से लेंगे इनकम टैक्स से जुड़े आपके सवालों पर हल।


टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया का कहना है कि इनकम टैक्स के कई तरह के नोटिस होते हैं। नोटिस मिलने पर पहले मतलब समझें और फिर उसका जबाव दें। नोटिस सेक्शन 143(1), 143(2) और 143(3) के तहत भेजे जाते हैं। लेकिन सभी सेक्शन का मतलब अलग-अलग होता है।


सेक्शन 143(1)
सेक्शन 143(1) के तहत नोटिस मिलने का मतलब आपका रिटर्न आईटी विभाग ने मान लिया है। इसमें कुल आय पर कितना टैक्स बनता है और कितना टैक्स दिया यह बताया जाता है। ये आईटी विभाग का इंटीमेशन है जो वो करदाता को भेजते हैं। अगर इसमें कुल टैक्स की कोई देनदारी नहीं है तो अच्छा है। लेकिन अगर टैक्स की कुछ देनदारी बताई गई है तो इसे चुकाना जरूरी होगा।


सेक्शन 143(2)
सेक्शन 143(2) का मतलब आपका केस स्क्रूटनी के लिए चुना गया है। असेसिंग अधिकारी आईटी रिटर्न पर और ज्यादा जानकारी चाहता हैं। अगर असेसिंग अधिकारी को लगता है कि आपने गलत छूट लिया है तो नोटिस भेजा जाता है। वित्त वर्ष के खत्म होने के 6 महीने बाद स्क्रूटनी का नोटिस नहीं भेजा जा सकता है। 


सेक्शन 143(3)
सेक्शन 143(3) ये स्क्रूटनी असेसमेंट जिसका आपने रिटर्न भरा है, उसका असेसमेंट ऑर्डर है। इसमें आपको कुछ छूट नहीं मिलेंगी या फिर कुल इनकम में कुछ जोड़ दिया जाएगा। इससे सेक्शन 143(3) के तहत टैक्स डिमांड बनेगा। इसके खिलाफ असिस्टेंस कमिश्नर आईटी से अपील कर सकते हैं।


सेक्शन 154
सेक्शन 154 के तहत रिकॉर्ड में दिख रही गलती को सुधारने के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। असेसिंग अधिकारी असेसमेंट ऑर्डर, इंटीमेशन में बदलाव कर सकता है। असेसी भी असेसमेंट ऑर्डर में गलती सुधारने के लिए अप्लाई कर सकता है। गलती सुधार के तहत असेसिंग अधिकारी कोई नया टैक्स नही जोड़ सकता और ना ही छूट के लिए मना कर सकता है।            


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