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म्युचुअल फंड के लिए रिस्कोमीटर लागू

अब आप म्युचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड में कितनी रिस्क है ये समझ पाएंगे।
अपडेटेड May 04, 2015 पर 11:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

1 जुलाई से म्युचुअल फंड में कलर कोडिंग की जगह रिस्कोमीटर लागू होने वाला है यानी अब आप म्युचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड में कितनी रिस्क है ये समझ पाएंगे।


एमएफ रिस्कोमीटर जोखिम का स्तर दिखाने वाला मीटर है जो 5 लेवल के जोखिम को दिखाएगा। ये 1 जुलाई 2015 से लागू
होगा और फंड हाउस इसे तत्काल भी लागू कर सकते हैं। इससे निवेशकों के लिए समझने में आसानी होगी। अब से एएमसी को को हर विज्ञापन या सूचना में रिस्कोमीटर डालना होगा। सेबी का मानना है कि कलर कोडिंग से कंफ्यूजन होता था और कई अलग अलग तरह के फंड एक ही श्रेणी में आ जाते थे जो सही नहीं था।


वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार का कहना है कि कलर कोडिंग का सिस्टम भी अच्छा था लेकिन इसमें थोड़ा असमंजस रहता था। अब सेबी ने 5 तरह के जोखिम को बताने वाला सिस्टम लाया है। इससे एमएफ की सतही जांच तो हो सकती है लेकिन किसी भी म्युचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले सिर्फ रिस्कोमीटर के भरोसे नहीं रहना चाहिए। निवेशकों के लिए निवेश को समझना और जरूरत के हिसाब से निवेश करना ज्यादा जरूरी है।


अब रिस्कोमीटर से निवेशकों को पता चल पाएगा कि किस फंड में कितना जोखिम है लेकिन ये पूरी तरह सफल नहीं हो सकता है। निवेशकों को अपनी अवधि, जोखिम और लक्ष्य, जरूरतों के हिसाब से निवेश करना चाहिए।


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