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रियल एस्टेट सेक्टर में दिक्कतें, क्या होगा भविष्य

लगातार बढ़ता कर्ज रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
अपडेटेड Jun 04, 2015 पर 12:58  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लगातार बढ़ता कर्ज रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। रियल एस्टेट में नकदी की दिक्कत बढ़ती जा रही है। प्रोमोटर के ज्यादातर शेयर गिरवी रखे हुए हैं जिसके बाद अब और गुंजाइश नहीं है। ज्यादातर कंपनियां नॉन कोर एसेट्स बेच रही हैं और ज्यादातर कंपनियां प्रॉपर्टीज को डिस्काउंट पर बेच रही हैं। नए प्रोजेक्ट लॉन्च वित्त वर्ष 2016 तक लटके हुए हैं।


बाजार की बुनियाद को हिलाने में सबसे बड़े विलेन रियल एस्टेट शेयर साबित हुए हैं। कर्ज के बोझ ने सिर्फ कंपनियों के शेयर ही नहीं तोड़े बल्कि इससे बाजार का विश्‍वास भी डगमगाया है। दिग्गज कंपनियों पर कितना कर्ज है और उनके लिए ये कितनी बड़ी चिंता है, इसी पर सीएनबीसी आवाज़ का खास शो हिल गई बुनियाद।


मार्च 2015 तक रियल एस्टेट कंपनियों की कर्ज की स्थिति कैसी थी इस पर एक नजर डाल लेते हैं। रियल एस्टेट दिग्गज डीएलफ पर 20,965 करोड़ रुपये का कर्ज है और इंडियाबुल्स रियल पर 5,480 करोड़ रुपये का कर्ज है। यूनिटेक पर 6,332 करोड़ रुपये का कर्ज बोझ है। वहीं शोभा डेवलपर्स पर 1813 करोड़ रुपये का कर्जा है। एचडीआईएल पर 2942 करोड़ रुपये, गोदरेज प्रॉपर्टीज पर 2764 करोड़ रुपये, ब्रिगेड एंटरप्राइज पर 1254 करोड़ रुपये और ऑर्बिट कॉर्प पर 764 करोड़ रुपये का कर्ज बना हुआ है।


रियल एस्टेट कंपनियों पर कर्ज इतना ज्यादा क्यों है इसके पीछे कुछ अहम कारण हैं। कंपनियों को जमीन खरीदने पर खर्च बहुत ज्यादा करना पड़ता है। प्रोजेक्ट में देरी, मंजूरी मिलने में दिक्कत से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ती है। प्रॉपर्टी की मांग में कमी होने और ब्याज दरें ज्यादा होने से भी कंपनियों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। बिक्री नहीं होने से लगातार बढ़ती इन्वेंटरी के चलते कंपनियों के खर्च बढ़ रहे हैं।


देना बैंक के ईडी आर के टक्कर का कहना है कि बाजार में फिलहाल रियल एस्टेट के खरीदार नहीं हैं। कुछ रियल एस्टेट कंपनियों की हालत इतनी खराब है कि वो डिफॉल्ट के कगार पर आ गई हैं। वहीं कुछ रियल एस्टेट कंपनियों की ईएमआई में देरी हो रही है। हालांकि कुछ रियल्टी ग्रुप अच्छा कारोबार भी कर रहे हैं। प्रॉपर्टी के खरीदार अभी इंतजार कर रहे हैं कि प्रॉपर्टी की कीमत कुछ कम होंगी और बैंकों की ब्याज दरें कम होने का भी इंतजार कर रहे हैं। आगे ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों को भारी दिक्कत हो सकती है।


रिस्क कैपिटल एडवाइजर्स के डी डी शर्मा का कहना है कि रियल एस्टेट कंपनियों को कैश फ्लो की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि रियल एस्टेट कंपनियों के पास ऐसेट हैं लेकिन उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हाथ में कैश की जरूरत पड़ती है। कुछ रियल्टी कंपनियों को कैश की काफी दिक्कतें हैं और उनका मार्केट कैप भी घटा है। बाजार में रियल्टी कंपनियों के लिए उम्मीदें घटी हैं और उनकी खराब हालत का असर उनके शेयरों पर देखा जा रहा है। ऐसा ही कल के बाजार में रियल्टी कंपनियों के साथ हुआ है।


एनआईएफसीओ के एमडी और सीईओ अमित गोयनका का कहना है कि बाजार में रियल्टी कंपनियों के शेयरों में गिरावट का खतरा बना हुआ है। कंपनियों की भविष्य की अर्निंग को लेकर शंकाएं बनी हुई है। प्राइसिंग पर दबाव बना हुआ है और जिन कंपनियों की बिक्री हो रही है वहां भी बिल्डर ने ग्राहकों का भार अपने ऊपर लिया है और अपने मार्जिन कम किए हैं। इतना सब होने के बाद भी रियल्टी कंपनियों के लिए लिक्विडिटी की दिक्कत बेतहाशा कम होने की संभावना कम है।


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