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मैगी के बुरे दिन, अब क्यों जागा रेगुलेटर!

सवाल ये है कि 30 साल से खाई जा रही मैगी के मानकों पर एफएसएसएआई अब क्यों जागा है।
अपडेटेड Jun 05, 2015 पर 17:05  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मैगी का मातम मना रही नेस्ले कंपनी इस समय शायद समझने की कोशिश कर रही होगी कि पिछले एक हफ्ते में आखिर हुआ क्या । इस वक्त मनचाहें ब्रांड मैगी पर देश भर की नाराजगी जताई जा रही है। और ये बिलकुल जायज हैं क्योंकि खाने की सेफ्टी की जांच करने वाली एफएसएसएआई ने ऐलान कर दिया हैं कि उनके टेस्ट में मैगी में मानक से ज्यादा लेड पाई गयी हैं। नेस्ले को भारत में फिरसे मैगी बेचने के लिए अब नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी। लेकिन इस सारी कहानी से जो एक सबसे बड़ा सवाल उठता हैं, कि आखिर हमारे बाकी के खाने में कितना लेड हैं। जो हम रोज खाते हैं वो कितना सुरक्षित हैं। और जो एजेंसी अब जागी हैं, वो आज से इतने सालों तक क्या कर रही थी। क्या जो मैगी 30 साल से हम सब खा रहे थे वो लेड से भरा हुआ था? उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या हमारे खाने की दूसरी चीज़ लेड से बचे हुए हैं। और इन बाकी चीजो की जांच क्या एफएसएसएआई करवाने वाली है। इन सब सवालों के जवाब जानने की कोशिश की गई है इस खास पेशकश में।


पहली बार नेस्ले इस मामले पर मजबूती के साथ सामने आई। कंपनी के ग्लोबल सीईओ पॉल बुल्के मीडिया के सामने आए और कहा कि मैगी पूरी तरह सुरक्षित है। नेस्ले के मुताबिक पूरी दुनिया में मैगी के लिए गुणवत्ता का एक ही मानक है। मैगी में एमएसजी नहीं डालते हैं और सभी तत्व सही मात्रा में हैं। नेस्ले ग्लोबल के सीईओ ने कहा कि हाल की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इस विवाद से ग्राहकों का भरोसा हिला है। लेकिन नेस्ले की ओर से सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा और कंपनी के लिए ग्राहकों का हित सर्वोपरि है।


नेस्ले ने अपनी सफाई में ये भी कहा कि मैगी के जांच के तरीके पर असमंजस है और हमारी जांच में कोई गड़बड़ी नहीं है। हमारे 1000 बैच में कुछ नहीं निकला और लेड की मात्रा सीमा से बेहद कम है। रेगुलेटर के साथ चर्चा कर रहे हैं और जांच परिणाम समझने की कोशिश की जा रही है। कंपनी के लिए भारत बेहद खास है और यहां कारोबार करने की दिक्कत नहीं है।


एफएसएसएआई यानि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मैगी के सभी 9 अप्रूव्ड वैरिएंट्स को मार्केट से रिकॉल करने का आदेश दिया है। एफएसएसएआई का मानना है कि मैगी के सभी वैरिएंट्स खाने योग्य नहीं है। एफएसएसएआई ने तुरंत इन प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, इंपोर्ट, डिस्ट्रिब्यूशन और बिक्री पर रोक लगा दी है। नेस्ले का दावा झूठा, लेड की मात्रा लिमिट से ज्यादा है। वहीं नेस्ले ने ओट्स मसाला नूडल के लिए मंजूरी नहीं ली थी। मैगी के पैकेट पर नो एडेड एमएसजी भ्रामक है। नेस्ले पर टेस्ट बढ़ाने वाले एमएसजी को लेकर लेबलिंग नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगाते हुए एफएसएसएआई ने 3 दिनों के अंदर कंपनी से जवाब मांगा है।


एफएसएसएआई के सीईओ वाई एस मलिक ने कहा नेस्ले का दावा झूठा है और इसी के चलते मैगी के प्रोडक्शन, प्रोसेसिंग, इंपोर्ट, डिस्ट्रिब्यूशन और बिक्री पर रोक लगाई गई है। जब मैगी को मंजूरी दी गई थी तब इसमें लेड (सीसा) की मात्रा कम (0.0153) थी। एफएसएसएआई नेस्ले के टेस्ट पर सवाल नहीं उठा रही है लेकिन कंपनी की तरफ से प्रोसेसिंग करते समय लेड के स्तर को चेक करने में खामी रही है ये बात साफ है।


मैगी नूडल्स से जुड़ा विवाद अपने क्लाइमैक्स पर पहुंचता दिख रहा है। इस मामले में अब प्रधानमंत्री के दफ्तर यानी पीएमओ ने भी दखल दे दिया है। पीएमओ ने इस मामले में स्वास्थ्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। उधर आज बिहार और मध्य प्रदेश ने भी मैगी पर रोक लगाने का फैसला किया है।


हालांकि बड़ा सवाल ये है कि जब एक प्रोडक्ट को जंक फूड के रूप में स्वीकार कर लिया गया है तो फिर इतना हंगामा क्यों है? दिल्ली सरकार या एफएसएसएआई जो ज्यादा एक्टिव दिख रही है, परेशान क्यों नहीं है। मैगी के सभी पैकेटों पर एफएसएसएआई का स्टांप लगा होता है।


किसके जरिए जारी सर्टिफिकेट पर लोगों और रिटेलर को विश्वास करना चाहिए। फूड प्रोडक्ट और इसके रिटेलर की जांच के लिए कितने मंत्रालय, सरकार और संस्थाओं को अधिकार दिया गया है। हमारे देश की 90 फीसदी आबादी अपनी खुराक का 80 फीसदी हिस्सा असंगठित स्रोतों ले लेता है। इसमें लेड सहित दूसरे खतरनाक तत्व की मात्रा कितनी है? इसकी परवाह किसे है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? ये सब बड़े सवाल हैं जिनके जवाब मिलने की जरूरत है।


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