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समय-समय पर करें इंश्योरेंस की समीक्षा

यशीश दहिया के मुताबिक समय से और जल्द इंश्योरेंस लेना बेहतर होता है। जल्दी इंश्योरेंस लेने से प्रीमियम कम होता है।
अपडेटेड Jul 20, 2015 पर 16:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

लाइफ इंश्योरेंस के बिना फाइनेंशियल प्लानिंग अधूरी है। लाइफ इंश्योरेंस आपको न सिर्फ सुरक्षा देता है बल्कि इसे लेने से आपको मन की शांति भी मिलती है। जीवन बीमा की बारीकियों को समझने के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं लाइफ इंश्योरेंस की समझ। इंश्योरेंस की बारीकियों को समझाने के लिए आज हमारे साथ हैं पॉलिसी बाजार के को फाउंडर और सीईओ यशीश दहिया।


इंश्योरेंस तो है फिर नए प्लान की क्या जरूरत है। बदलते समय और बदलती परिस्थितियों के साथ इंश्योरेंस की जरूरत भी बदलती है। लेकिन हममें से ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज करते हैं। लेकिन ये ठीक नहीं है। आइए जानते हैं कि क्यों बदलती जिंदगी के साथ इंश्योरेंस की जरूरतों को भी बदलना जरूरी है।


समय-समय पर इंश्योरेंस कवरेज को रीव्यू करना जरूरी होता है। अलग-अलग समय पर हमारी वित्तीय जरूरत अलग-अलग होती है। शादी के बाद पत्नी का भविष्य भी सुरक्षित करना जरूरी होता है। बच्चों के भविष्य और पढ़ाई के लिए निवेश जरूरी होता है। ऐसे में समय के साथ लाइफ कवर बढ़ाना जरूरी हे जाता है। इसलिए समय के साथ इंश्योरेंस कवर की समीक्षा करते रहना चाहिए और इनकम बढ़ने के साथ निवेश की राशि बढ़ाते रहना चाहिए।


यशीश दहिया के मुताबिक समय से और जल्द इंश्योरेंस लेना बेहतर होता है। जल्दी इंश्योरेंस लेने से प्रीमियम कम होता है। इसलिए जल्द इंश्योरेंस लें और समय-समय पर पॉलिसी रीव्यू करें। उम्र बढ़ने पर पॉलिसी के बजाय टॉप-अप हेल्थ कवर लेना बेहतर होता है। टॉप-अप हेल्थ कवर से आप पॉलिसी का सम एश्योर्ड बढ़ा सकते हैं। यशीश दहिया ने कहा कि हमें अपनी सालाना इनकम का 10 गुणा इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए।


इंश्योरेंस लेते समय ध्यान रखें कि इंश्योरेंस पॉलिसी से लोन चुकता होना चाहिए, पॉलिसी से सैलरी की सभी जरूरतें पूरी होनी चाहिए। पॉलिसी लेते समय सभी जिम्मेदारियों को भी जोड़ें। इसके साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों का बीमा भी जरूरी होता है।


यशीश दहिया के मुताबिक शादी से पहले हेल्थ इंश्योरेंस और पर्सनल एक्सीडेंट कवर लें, शादी के बाद हेल्थ, इंश्योरेंस के साथ लाइफ कवर लें। बच्चे होने के बाद लाइफ और एक्सीडेंट कवर को बढ़ाएं। 30-35 साल में क्रिटिकल इलनेस कवर लें। 60 साल के बाद हेल्थ इंश्योरेंस को फैमिली से अलग करें। लेकिन इंश्योरेंस को निवेश का जरिया नहीं बनाएं।


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