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नतीजों में दिखा सुधार, क्रूड लगाएगा बेड़ा पार

प्रकाशित Thu, 23, 2015 पर 10:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

मार्केट एक्सपर्ट निपुण मेहता का कहना है कि बाजार में जो भी अधिग्रहण या विलय हो रहे हैं, उनमें आगे चलकर शेयरधारकों की तरफ से चिंताएं उभरकर आ रही हैं। इसके कई उदाहरण हैं जैसे सन फार्मा-रैनबैक्सी का विलय, माइक्रोसॉफ्ट-नोकिया का विलय या अब केर्न-वेदांता का विलय भी शेयरधारकों की सहमति के बिना पूरा नहीं हो सकते हैं। केर्न इंडिया-वेदांता के विलय पर शेयरधारकों की चिंताएं सुलझनी जरूरी हैं और उसके बाद ही दोनों कंपनियों के लिए ये फायदे के सौदा हो सकता है।


पिछले दिनों एफआईआई की बिकवाली के बाद अब उनकी तरफ से खरीदारी आ रही है। वहीं चीन की चिंताओं के चलते अब भारतीय घरेलू बाजार में भी खरीदारी लौट रही है। तिमाही नतीजों में कुछ मोर्चे पर सुधार है लेकिन निजी बैंकों के एनपीए भी अब बढ़ते दिख रहे हैं जो कुछ चिंता का विषय है। जैसे जैसे नतीजों का सीजन गुजरेगा, वैसे वैसे बाजार को पॉजिटिव ट्रिगर मिल सकता है। बड़ी कंपनियों से तो उम्मीदें हैं ही लेकिन मिडकैप कंपनियों के प्रदर्शन में भी हल्का सुधार हो रहा है। कुछ दिग्गज कंपनियों के नतीजों का बाजार को इंतजार है और अगर ये अच्छे रहते हैं तो इनके शेयरों में ऊंचे स्तरों पर मुनफावसूली हो सकती है।


कच्चे तेल की गिरावट पिछले दिन घरेलू बाजार के लिए सहायक रही है और कमोडिटी की कीमतों के गिरने का फायदा भी करेंट अकाउंट घाटा घटने, वित्तीय घाटा कम होने के रूप में मिल रहा है। हालांकि कच्चे तेल की गिरावट का फायदा पेंट कंपनियों, ऑयल कंपनियों को जरूर मिल रहा है। कच्चे तेल के सस्ते होने का फायदा जून तिमाही के नतीजों में मिल रहा है और आगे सितंबर तिमाही में भी इसका फायदा मिलेगा।


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