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पहला कदमः फाइनेंशियल लिटरेसी की दिशा में पहला कदम

प्रकाशित Sat, 22, 2015 पर 12:52  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ की फाइनेंशियल लिटरेसी की मुहिम में आज आपकी बारी है पहला कदम उठाने की। आज से हमारे इस खास मिशन का पहला चैप्टर शुरू होता है। यानी आपके फ्री टीवी डिप्लोमा कोर्स का पहला टर्म शुरू होता है आज से। आज पहला कदम में आज हम बात करेंगे बजट की। बजट क्या होता है, बजट कैसे बनाया जाता है और किसी भी शख्स की फाइनेंशियल प्लानिंग में बजट बनाना कितना अहम है। आज हम इन्ही सब बातों पर चर्चा करेंगे अपने एक्सपर्ट के साथ जो बताएंगे कि आर्थिक साक्षरता की दिशा में उठने वाला पहला कदम कैसा होना चाहिए। आज पहला कदम में जानेंगे कि वित्तीय सुरक्षा के लिए बजट क्यों जरूरी है।


बजट किसे कहते हैं ?
बजट आमदनी और खर्च का ब्यौरा होता है और खास अवधि के लिए होता है। खर्च से बची आय बचत कहलाती है और आय से ज्यादा खर्च घाटा कहलाता है। खर्च के मोटे अनुमान को बजट नहीं कहते हैं और बजट में आय और खर्च का पूरा ब्यौरा होता है। बजट बनाना सबके लिए फायदेमंद होता है और सरकारें भी बनाती हैं सालाना बजट। हालांकि परिवार हर महीने बजट बना सकते हैं।


बजट की क्या जरूरत है ?
बजट से एडवांस प्लानिंग में मदद मिलती है और बजट से आर्थिक स्थिति का अंदाजा होता है। बजट से खर्च की प्राथमिकता तय करना आसान होता है और बजट से गैरजरूरी खर्चों पर लगाम लगती है। बजट से आमदनी और खर्च में संतुलन रहता है और बचत और निवेश की प्लानिंग में मदद मिलती है।


बजट बनाने से किसको फायदा ?
बजट बनाने से प्रोफेशनल्स को आमदनी-खर्च का सही अंदाजा रहता है और घरेलू महिलाओं को घर चलाने में सहायता मिलती है। बजट बच्चों को पॉकेट मनी की प्लानिंग सिखाता है। बजट के जरिए भविष्य के निवेश के लिए पैसा बचाया जा सकता है।


मंहगाई का अनुमान 
बजट में महंगाई दर का हिसाब रखना जरूरी है और इमरजेंसी फंड से मंहगाई से निपट सकते हैं। बचत की कमाई से मंहगाई के खर्चों पर काबू पा सकते हैं।


कारोबारी का बजट
कारोबारियों के लिए बजट बनान बेहद जरूरी होता है और कारोबारी बजट में खर्चों का पूरा ब्यौरा होना चाहिए। बजट कारोबार के लिए अहम जरूरत है और बिजनेस का बजट अलग होता है। बजट बनाते समय पिछले साल के खर्च को ध्यान में रखकर बनाएं।


घर का बजट
महीने का बजट बनाते वक्त अन्य खर्चो के लिए एक निश्चित रकम तय करना काफी होगा या अन्य खर्चों की डिटेलिंग करनी चाहिए, ये एक बड़ा अहम सवाल है।कई अतिरिक्त यानी जिन खर्चों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। हर महीने खर्चों में अंतर आ सकता है तो अपने अनुभव से अन्य खर्चो के लिए पैसों का इंतजाम करें। बेसिक खर्चों की डिटेलिंग जरुरी होती है। 


बजट की आदत बचपन से डाल लेनी चाहिए। आप खुद बच्चों के खर्च के लिए पैसे तय करें और उन्हें बताएं कि हर महीने तय जेब खर्च से गुजारा करने की आदत डालना जरुरी है। बच्चों को हिसाब लिख कर रखने की आदत डालनी चाहिए।


सालाना प्रीमियम भरने के लिए हर महीने पैसे बचाना जरूरी होता है और पहले से पता होता है कि ऐसे खर्च की प्लानिंग करनी है तो इसके लिए तैयार रहें। बजट में मंहगाई का अनुमान और महंगाई दर का हिसाब रखना जरूरी होता है। आप इमरजेंसी फंड से मंहगाई से निपट सकते हैं और बचत की कमाई से मंहगाई के खर्चों पर काबू पा सकते हैं।


बजट बनाते वक्त खर्चों को दो हिस्सों में बांट देना चाहिए। सबसे पहले जरूरी खर्च जैसे राशन, बिजली, पानी, गैस, स्कूल फीस, और कई जरूरी खर्च जो करने ही करने होते हैं। दूसरा ऐसे खर्च जिन्हें टाला जा सकता है। जैसे होटल, एंटरटेनमेंट, शॉपिंग जैसे खर्चों में कटौती कर सकते हैं और इन्हें टालने से कोई नुकसान नहीं होता।


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