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टैक्स की परेशानी, दूर करने में होगी आसानी

टैक्स गुरू में आपके इनकम टैक्स से जुड़े सवालों के जवाब देंगे टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया।
अपडेटेड Oct 03, 2015 पर 18:11  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हाजिर है टैक्स बचाने में आपकी मदद करने वाला शो टैक्स गुरू। इनकम टैक्स भले ही आप हर साल देते हों लेकिन इससे जुड़ी कई चीजें आपतो पता नहीं होती या फिर सही सलाह नहीं मिलती। टैक्स गुरू में आपके इनकम टैक्स से जुड़े सवालों के जवाब देंगे टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया।


सवालः कुछ फार्म हैं जिन्हें भरकर टैक्स डिडक्शन से बचा जा सकता है। लेकिन कुछ शर्तें हैं जिनका ध्यान रखना होता है। तो कौन हैं जो ये फार्म भरकर टैक्स डिडक्शन से बच सकते हैं। और किन मानदंडो में उन्हों फिट बैठन होगा?


सुभाष लखोटिया: कुछ फार्म भरकर बैंको को दे दें तो आपका टैक्स नहीं कटेगा , ये हकीकत है। ये प्रावधान आयकर की धारा 197 ए में दिए गए हैं, जिसके तहत ब्याज के भुगतान पर टैक्स कटौती से छूट मिलती है। जिसके लिए टैक्सपेयर को डिक्लरेशन देना होता है। ये डिक्लरेशन फॉर्म 15 जी या फार्म 15 एच में करना होता है। लेकिन फॉर्म 15 जी भरने के पहले उसको अच्छी तरह से पढ़ लें। 15 जी में निवेशित रकम का ब्योरा देना होता है। एसेसी की अनुमानित कुल आय पर टैक्स देनदारी शून्य होनी चाहिए। आय के एग्जेंप्शन लिमिट से कम होने पर ही फॉर्म 15 जी भरें। फॉर्म 15 जी की दे कॉपी जमा करें। फार्म 15 एच 60 साल से ज्यादा उम्र वाले टैक्सपेयर भरते हैं।


सवालः मैं ज्वेलरी शॉप चलाता हूं। मुझें शेयर कारोबार में 2.60 लाख ले ज्यादा का फायदा हुआ है। ट्रेडिंग इनकम का क्या करें, क्या मुझे ऑडिट करना पड़ेगा?


सुभाष लखोटिया: आपको टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं है। अगर सिर्फ कैपिटल गेंस इनकम हो तो ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती। अगर स्पेक्युलेटिव इनकम है तो सिर्फ खरीद और बिक्री का अंतर रोजाना का टर्नओवर माना जाता है।


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