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रिस्क वेटेज घटा, आपकी जिंदगी कैसे होगी आसान

आरबीआई ने होम लोन पर रिस्क वेटेज कम कर दिया है। अब बैंक 30 लाख रुपये तक का होमलोन 90 फीसदी एलटीवी पर दे सकेंगे।
अपडेटेड Oct 17, 2015 पर 14:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फाइनेंशियल प्लानिंग के जरिए आप ना सिर्फ अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकते हैं। बल्की अपने लक्ष्यों को भी हकीकत में बदल सकते हैं। आपकी जिम्मेदारियों और गोल्स को पूरा करने में आपकी मदद करता है सीएनबीसी-आवाज़ का खास शो योर मनी। योर मनी में आज आपके सवालों के जरिए आपकी निवेश की उलझनों को सुलझा रहे हैं आनंदराठी प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज


सबसे पहले बात करेंगे आपके होमलोन के आसान बनने की। हाल ही में रिजर्व बैंक ने होम लोन पर रिस्क वेटेज कम कर दिया है। इसके बाद बैंक 30 लाख रुपये तक का होमलोन 90 फीसदी एलटीवी पर दे सकेंगे। फिलहाल बैंकों को 90 फीसदी एलटीवी पर 20 लाख रुपये तक का होमलोन देने की इजाजत थी। 90 परसेंट एलटीवी का आपके लिए ये मतलब है कि आपको प्रॉपर्टी की कीमत पर 90 फीसदी तक लोन मिल जाएगा। रिजर्व बैंक ने क्रेडिट पॉलिसी में इसका एलान किया था। रिजर्व बैंक ने 75 लाख रुपये तक के होमलोन पर रिस्क वेटेज घटाया है। इस एलान के बाद बैंक 75 लाख रुपये तक के होमलोन को आसान शर्तों पर दे सकेंगे।


माना जा रहा है कि रिस्क वेटेज घटने के बाद बैंक छोटी रकम के होमलोन पर ब्याज दर में कटौती भी कर सकते हैं। रिस्क वेटेज घटने से बैंकों के पास लोन देने के लिए ज्यादा पूंजी बचती है। एलान के मुताबिक 30 लाख रुपये तक के लोन पर 80 फीसदी तक एसटीवी पर रिस्क वेटेज 35 फीसदी है, जबकि 80 से ज्यादा और 90 फीसदी तक एलटीवी पर रिस्क वेटेज 50 फीसदी है। 30 लाख से ज्यादा और 75 लाख तक के लोन पर अगर एलटीवी 75 फीसदी है तो रिस्क वेटेज 35 फीसदी है, वहीं 75 से ज्यादा और 80 फीसदी तक एलटीवी पर रिस्क वेटेज 50 फीसदी है। 75 लाख से ज्यादा के होमलोन पर रिस्क वेटेज 75 फीसदी है। तो इससे किस तरह आसान होगी आपकी जिंदगी, समझते हैं फिरोज से।


फिरोज अजीज का कहना है कि लिमिट बढ़ने से लोगों के ज्यादा लोन मिल सकेगा। ज्यादा लोन का मतलब है ईएमआई में बढ़ोतरी। इस लिए लोन लेते समय ब्याज दर और लोन की अवधि भी देखें और जरूरत पड़ने पर निवेशक एसेट एलोकेशन में बदलाव करें।


फिरोज अजीज के मुताबिक अक्सर रेपो रेट में कटौती का पूरा फायदा बैंक कंज्यूमर तक नहीं पहुंचाते। गौरतलब है कि साल की शुरुआत से अब तक आरबीआई ने 1.25 फीसदी रेपो रेट घटाए हैं। लेकिन बैंकों ने ब्याज दरों में सिर्फ 0.5 फीसदी तक की कटौती की है। बैंकों को प्रॉविजनिंग का भी ख्याल रखना होता है। क्योंकि पुराने डिपॉजिट पर बैंकों को पुरानी दरों पर ही ब्याज देना होता है।


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