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पहला कदमः म्युचुअल फंड क्या होते हैं

म्युचुअल फंड में निवेश कैसे किया जाता है और इनमें निवेश के क्या फायदे हैं हम इसी पर बात कर रहे हैं।
अपडेटेड Oct 31, 2015 पर 18:06  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फाइनेंशियल लिटरेसी की जरूरत देश में आज हर छोटे बड़े को है। युवा हों या फिर रिटायर्ड लोग, किसान हों या फिर आंत्रप्रेन्योर, प्राइवेट नौकरी करते हों या सरकारी,  हर किसी के लिए जरूरी है कि वो मेहनत मशक्कत से जो पैसा कमा रहे हैं उसे बचाएं ही नहीं बढ़ाएं भी। सीएनबीसी-आवाज इसी मुहिम में लगा है। हम चाहते हैं कि हर कोई देश के फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़े।


आप हमें लिख सकते हैं फेसबुक पर सीएनबीसी-आवाज़ के पेज पर या फिर आप हमारी वेबसाईट pehlakadam.in पर भी अपना मेसेज छोड़ सकते हैं। पहला कदम में आज हम बात कर रहे हैं म्युचुअल फंड की। म्युचुअल फंड आज के दौर में निवेश के सबसे आकर्षक इंस्ट्रूमेंट्स हैं। म्युचुअल फंड क्या होते हैं, इनमें निवेश कैसे किया जाता है और इनमें निवेश के क्या फायदे हैं हम इसी पर बात कर रहे हैं।


म्युचुअल फंड निवेश का एक तरीका है और इससे निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। निवेश से पहले म्युचुअल फंड की जानकारी जरूरी है। म्युचुअल फंड कई निवेशकों से पैसा इकट्ठा करते हैं और निवेशकों का पैसा फंड मैनेजर को निवेश के लिए देते हैं। फंड मैनेजर पैसे को सही जगह निवेश करते हैं।


म्युचुअल फंड में निवेश के वैल्यु नेट एसेट वैल्यु में दिखाई देती है और नेट एसेट वैल्यु को एनएवी भी कहा जाता है। एनएवी के जरिए ही निवेश के रिटर्न का पता लगता है। एनएसी से नफा-नुकसान का पता लगता है। वहीं निवेशक जब चाहे तब फंड से बाहर हो सकते हैं।


म्युचुअल फंड इक्विटी के अलावा दूसरी जगहों पर भी निवेश करते हैं। म्युचुअल फंड केवल इक्विटी में पैसा नहीं लगाते हैं। म्युचअल फंड डेट, सरकारी सिक्योरिटीज, बॉन्ड्स और डिबेंचर्स में भी पैसा लगाते हैं। गोल्ड म्युचुअल फंड गोल्ड में निवेश करते हैं। अलग-अलग फंड अलग अलग जगह निवेश करते हैं।


म्युचुअल फड 10 रुपये की कीमत से शुरू होते हैं और कम वैल्यु से बड़ा फायदा मुमकिन नहीं है। एनएवी का मुनाफे से कोई रिश्ता नहीं होता है। एनएवी केवल न्यूमेरिकल वैल्यु है और एनएवी फंड के एक हिस्से की वैल्यु है। एनएवी निवेशक के फंड के प्रदर्शन के बारे में बताता है। मसलन 10 रुपये की एनएवी 11 रुपये की हो जाती है तो इसका मतलब फंड ने 10 फीसदी रिटर्न दिया है। म्युचुअल फंड पूरी तरह बाजार की तर्ज पर नहीं बढ़ते हैं। पोर्टफोलियो पर फंड का प्रदर्शन निर्भर होता है। बाजार के हालात और म्युचुअल फंड के प्रदर्शन में समानता नहीं होती है।


म्युचुअल फंड आम तौर पर 2 तरह के होते हैं। ओपन एंडेड फंड में निवेशक कभी भी निवेश से बाहर हो सकता है। इसमें निवेश कभी भी किया जा सकता है और फंड से बाहर आने की कोई मियाद नहीं है। ये फंड हमेशा चलते रह सकते हैं। वहीं क्लोज एंडेड फंज में निवेश का काफी कम वक्त होता है और फंड की खत्म होने की मियाद पहले से तय होती है। तय मियाद के बाद फंड सारा पैसा निवेशक को लौटा देता है।


म्युचुअल फंड - स्पॉन्सर, ट्रस्टी और एसेट मैनेजमेंट कंपनी इन 3 संस्थाओं को मिलाकर बनते हैं। एसेट मैनेजमेंट कंपनी को फंड मैनेजर भी कहते हैं और निवेशका का सीधा रिश्ता सिर्फ फंड मैनेजर से होता है। फंड मैनेजर निवेश की देखभाल करते हैं और रिटर्न्स को लेकर फंड मैनेजर की भूमिक अहम होती है।


म्युचुअल फंड में डाइवर्सिफिकेशन के चलते एक से ज्यादा जगहों पर निवेश मुमकिन है। भले ही निवेशक खुद एक ही जगह निवेश करता है, लेकिन म्युचुअल फंड में निवेश कई जगहों पर होता है। म्युचुअल फंड पोर्टफोलियो से निवेश डाइवर्सिफाइ होता है और डाइवर्सिफिकेशन से रिस्क कम होता है। फंड मैनेजर निवेश मैनेजमेंट के एक्सपर्ट होते हैं और फंड मैनेजर निवेशक का पोर्टफोलियो मैनेजमेंट करते हैं। फंड मैनेजर के पास एक्सपर्ट होते हैं और निवेशक की ओर से एक्सपर्ट निवेश करते हैं।


दरअसल वक्त की कमी के चलते निवेश के बार में सोचने की फुरसत नहीं होती है, लेकिन म्युचुअल फंड में निवेश पर नजर रखने का झंझट नहीं होता है। म्युचुअल फंड में बिना तवान के बड़ा पोर्टफोलिया बनाएं और लंबी अवधि का निवेश यहां फायदेमंद साबित हो सकता है। म्युचुअल फंड से लंबी अवधि का निवेश मुमकिन है।
 कोई भी शख्स 500 रुपये से म्युचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकता है।


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