दूसरी तिमाही का रिपोर्ट कार्ड, क्या हैं संकेत -

दूसरी तिमाही का रिपोर्ट कार्ड, क्या हैं संकेत

प्रकाशित Tue, 17, 2015 पर 13:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

तिमाही नतीजों का सिलसिला खत्म हो चुका है। कुछ सेक्टर के नतीजों से अच्छे दिन आने की उम्मीद बंधी है वहीं कुछ नतीजों ने बाजार की चिंता भी बढ़ाई है। सितंबर तिमाही के नतीजों से बाजार के लिए क्या हैं संकेत और अब निवेश के लिए क्या हो आपकी स्ट्रैटेजी, यही बताने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ लेकर आया है ये खास शो, तिमाही नतीजे, कैसी है सेहत? जिसमें शामिल हो रहे हैं एंजेल ब्रोकिंग के मयूरेश जोशी और इंडिया निवेश सिक्योरिटीज के दलजीत सिंह कोहली


आईटी कंपनियों के नतीजों की बात करें तो तिमाही दर तिमाही आधार पर वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में इंफोसिस की डॉलर आय 6 फीसदी बढ़ी है। वहीं टीसी की डॉलर आय 3 फीसदी, एचसीएल की डॉलर आय 0.50 फीसदी, विप्रो की डॉलर आय 2.10 फीसदी और टेक महिंद्रा की डॉलर आय 2.20 फीसदी बढ़ी है।


टेलीकॉम सेक्टर में वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में भारती एयरटेल के मार्जिन में 34.7 फीसदी और आइडिया के मार्जिन में 35.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि इन दोनों कंपनियों की आय घटी है। दूसरी तिमाही में भारती एयरटेल की आय 0.2 फीसदी और आइडिया की आय 1.5 फीसदी घटी है।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में बैंकों के एनपीए को लेकर चिंता बनी रही। इस तिमाही में पीएनबी का ग्रॉस एनपीए 6.36 फीसदी, बीओबी का ग्रास एनपीए 5.56 फीसदी, एसबीआई का ग्रॉस एनपीए 4.15 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक का ग्रॉस एनपीए 3.77 फीसदी, एक्सिस बैंक का ग्रॉस एनपीए 1.38 फीसदी, एचडीएफसी बैंक का ग्रॉस एनपीए 0.91 फीसदी, एचडीएफसी का ग्रॉस एनपीए 0.71 फीसदी, इंडसइंड बैंक का ग्रॉस एनपीए 0.77 फीसदी और एस बैंक का ग्रॉस एनपीए 0.61 फीसदी रहा।


फार्मा सेक्टर की बात करें तो वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में सनफार्मा की मार्जिन में सालाना आधार पर 28.30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर 9.80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी तिमाही में डॉ. रेड्डीज की मार्जिन में सालाना आधार पर 28.60 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 5.87 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। दूसरी तिमाही में ल्यूपिन की मार्जिन में सालाना आधार पर 20.20 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी तिमाही में सिप्ला की मार्जिन में सालाना आधार पर 22.90 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 2.70 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है।


ऑटो सेक्टर में वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में बजाज ऑटो की मार्जिन में सालाना आधार पर 21.60 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 2.80 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में हीरो मोटो की मार्जिन में सालाना आधार पर 15.80 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 2.30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में महिंद्रा एंड महिंद्रा की मार्जिन में सालाना आधार पर 11.10 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 0.40 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में मारुति की मार्जिन में सालाना आधार पर 16.30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, वहीं कंपनी की आय में सालाना आधार पर 3.90 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में टाटा मोटर्स की मार्जिन में सालाना आधार पर 11.20 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर 4.60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में कमोडिटी के दामों में गिरावट से मिडकैप कंपनियों के नतीजे बेहतर रहे हैं। एनएसई मिडकैप की 100 में से 77 कंपनियों का मुनाफा 13.7 फीसदी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में साल दर साल आधार पर  मिडकैप कंपनियों की आय में 1.2 फीसदी की गिरावट रही। इस तिमाही में सालाना आधार पर मिडकैप कंपनियों की अन्य आय में करीब 14 फीसदी का उछाल देखने को मिला। मिडकैप ऑटो, फार्मा, पावर कंपनियों में अच्छा मुनाफा देखने को मिला। जबकि स्टील, टेलीकॉम, माइनिंग कंपनियों का प्रदर्शन खराब रहा।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में अशोक लेलैंड, वॉकहार्ट, एलेंबिक फार्मा और ब्रिटानिया का मुनाफा दोगुना हो गया। वहीं बॉयोकॉन, टाटा कम्युनिकेशन और जस्ट डायल के मुनाफे में अन्य आय के चलते बढ़ोतरी देखने को मिली। जबकि इमामी, जुबिलैंट फूड्स, एनएमडीसी, जेएसडब्ल्यू स्टील के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में ऑटो सेक्टर में कच्चे माल के दाम गिरने से कंपनियों का मुनाफा बढ़ा जबकि बिक्री को लेकर चिंता बरकरार रही। नई कारें लॉन्च होने से मारुति के नतीजे ठीक रहे। वहीं कैपिटल गुड्स सेक्टर में ज्यादातर कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ ठीक रही, जबकि नए ऑर्डर को लेकर चिंता बरकरार रही।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में उत्तर, पश्चिम भारत में सीमेंट के दाम बढ़ने से सीमेट कंपनियों को फायदा हुआ और इंफ्रा पर सरकार के जोर से सीमेंट की मांग में मजबूती देखने को मिली। जबकि ट्रांसपोर्ट खर्च ज्यादा होने से मार्जिन पर हल्का दबाव देखने को मिला।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में कच्चे माल में कमी से एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिला। इस तिमाही में छोटी एफएमसीजी कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा। जबकि ग्रामीण इलाकों में सुस्त डिमांड ग्रोथ से चिंता बनी रही।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में मेटल कंपनियों का मुनाफा और बिक्री कमजोर रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मेटल के दाम गिरने से मेटल कंपनियों को नुकसान हुआ। अगली तिमाही में भी मेटल कंपनियों के नतीजे खराब रहने की आंशका है।


वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में रेगुलेटरी दिक्कतों से फार्मा कंपनियों का प्रदर्शन सही नहीं रहा। प्राइसिंग में दबाव से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव देखने को मिला। इस तिमाही में छोटी फार्मा कंपनियों की स्थिति ज्यादा बेहतर रही।


पावर सेक्टर की बात करें तो वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में कोयले के दाम में कमी से कंपनियों पावर कंपनियों का खर्च घटा। इसके अलावा क्षमता विस्तार का भी कंपनियों को फायदा मिला। दूसरी तिमाही में पावर सेक्टर की ज्यादातर कंपनियों के नतीजे बेहतर रहे।


एंजेल ब्रोकिंग के मयूरेश जोशी का कहना है कि वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में सीमेंट, ऑटो और आईटी कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे। नतीजों के बाद आईसीआईसीआई बैंक, अशोक लेलैंड, टीवीएस श्रीचक्र एंजेल ब्रोकिंग के पसंदीदा शेयर हैं।


इंडिया निवेश सिक्योरिटीज के दलजीत सिंह कोहली के मुताबिक इस तिमाही में ऑटो और पॉवर कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे हैं। नतीजों के बाद दिग्गज शेयरों में एसबीआई, इंफोसिस और आरआईएल इंडिया निवेश के पसंदीदा शेयर हैं। जबकि इंडिया निवेश के मुताबिक नतीजों के बाद अरविंदो फार्मा, कैपिटल फर्स्ट और एलआईसी हाउसिंग जैसे मिडकैप शेयरों में पैसे लगाना फायदेमंद हो सकता है।


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