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पहला कदमः म्युचुअल फंड की पूरी जानकारी

म्युचुअल फंड क्या होते हैं, इनमें निवेश कैसे किया जाता है और इनमें निवेश के क्या फायदे हैं।
अपडेटेड Nov 21, 2015 पर 15:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

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पहला कदम में आज हम बात कर रहे हैं म्युचुअल फंड की। म्युचुअल फंड आज के दौर में निवेश के सबसे आकर्षक इंस्ट्रूमेंट्स हैं। म्युचुअल फंड क्या होते हैं, इनमें निवेश कैसे किया जाता है और इनमें निवेश के क्या फायदे हैं आज हम इसी पर बात कर रहे हैं।


इक्विटी म्युचुअल फंड


पहले बात करते हैं इक्विटी म्युचुअल फंड की, इक्विटी फंड हजारों लोगों का पैसा जमाकर बनता है। हजारों निवेशकों से जमा पैसा इक्विटी शेयरों में निवेश होता है। हजारों लोग फंड मैनेजर के जरिए शेयर बाजार में निवेश करते हैं। हर फंड मैनेजर के पास मार्केट एक्सपर्ट्स की टीम होती है और एक्सपर्ट तय करते हैं कि कब और कहां निवेश किया जाए। इक्विटी फंड की किसी भी स्कीम में कई शेयर शामिल होते हैं।


इंडेक्स फंड


इंडेक्स फंड सेंसेक्स या निफ्टी में निवेशकों का पैसा लगाते हैं। इंडेक्स फंड निवेश का शुरुआती और सरल तरीका है। इंडेक्स फंड पर फंड मैनेजर से ज्यादा एक्सचेंज का कंट्रोल होता है। इंडेक्स में शामिल शेयर वैटेज एक्सचेंज तय करता है। इंडेक्स फंड में एक स्टैंडर्ड रिटर्न आता है और इंडेक्स फंड में औसत 17-18 फीसदी तक सालाना रिटर्न मुमकिन है। इंडेक्स में फंड में कम से कम 10 साल का नजरिया ठीक रहता है।


लार्ज कैप फंड


लार्ज कैप फंड में बड़ी कंपनियों के शेयर होते हैं। लार्ज कैप की कोई स्टैंडर्ड परिभाषा तय नहीं होती। ग्लोबल स्तर पर 1 बिलियन डॉलर की कंपनी लार्जकैप कंपनी कहलाती है। लार्ज कैप फंड को टॉप 100 या टॉप 200 फंड भी कहा जाता है।


मिडकैप फंड


मिडकैप की परिभाषा तय नहीं है, और मिडकैप की परिभाषा हर फंड अपनी तरह से तय करता है। मिडकैप फंड में इंडीव्युजुअल शेयर के मुकाबले उतार चढ़ाव कम होता है। मिडकैप फंड के रिटर्न ठीकठाक होते हैं, लेकिन मिडकैप फंड में लार्जकैप के मुकाबले उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। फंड मैनेजर का परफॉर्मंस देखकर निवेश करें और छोटे फंड में निवेश में रिस्क ज्यादा होता है।


मल्टीकैप फंड


डाइवर्सीफाइड फंड मल्टीकैप फंड ही होते हैं और मल्टीकैप फंड में रिस्क थोड़ा कम होता है।


ईएलएसएस


ईएलएसएस यानि इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम और इसमें 3 साल का लॉक इन पीरियड होता है। ईएलएसएस में केवल 3 साल का नजरिया ठीक नहीं है। कम से कम 5 साल का नजरिया रखकर निवेश करें। ईएलएसएस में निवेश पर टैक्स छूट मिलती है।


बैलेंस्ड फंड


बैलेंस्ड फंड डेट और इक्विटी में निवेश करता है। बैलेंस्ड फंड में डेट और इक्विटी निवेश का रेशियो होता है। डेट और इक्विटी का रेशियो फंड मैनेजर पर निर्भर करता है। कई बैलेंस्ड फंड का इक्विटी में एक्सपोजर ज्यादा होता है। बैलेंस्ड फंड में आमतौर पर 70-30 का रेशियो होता है। निवेशक को निवेश से पहले फंड का परफॉर्मेंस जरूर देखना चाहिए।


सेक्टर फंड


सेक्टर फंड किसी खास सेक्टर की कंपनियों में निवेश करते हैं। सेक्टर फंड में रिस्क बहुत ज्यादा होता है। सेक्टर फंड में मंदी और तेजी अनिश्चित होती है। सेक्टर फंड में निवेश उस सेक्टर की समझ होने पर ही करें। आम निवेशक के लिए सेक्टर फंड से ज्यादा डाइवर्सीफाइड फंड बेहतर हैं।


थीमैटिक फंड


किसी खास थीम को लेकर बनाए फंड थीमैटिक फंड कहलाते हैं जैसे इंडिया ग्रोथ फंड। कुछ सेक्टरों को चुनकर उन्हे थीम फंड का नाम दे दिया जाता है मसलन टीएमटी फंड, टीएमटी यानि टेलिकॉम, मीडिया और टेक्नोलॉजी थीम। थीमेटिक फंड में फंड मैनेजर पर भरोसा होने पर ही निवेश करें। नाम और ब्रांडिंग को लेकर कन्फ्यूज ना हो।


इंटरनेशनल फंड


म्युचुअल फंड बाजार में इंटरनेशनल फंड सबसे नए हैं और इनका मुनाफा विदेशी बाजार के परफॉर्मेंस पर निर्भर होता है। इंटरनेशनल डाइवर्सीफाइड फंड में निवेश बेहतर होता है। विदेश में निवेश की सीमा तय है और इंटरनेशनल फंड पर करेंसी के उतार-चढ़ाव का रिस्क ज्यादा होता है। रुपया गिरने पर इंटरनेशनल फंड से फायदा होता है, लेकिन रुपया मजबूत होने पर रिटर्न कम हो सकता है। इंटरनेशनल फंड के लिए अलग टैक्स कानून नहीं है।


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