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डीटीसी: टैक्स गुरु की राय

टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया ने डीटीसी लागू होने पर आयकर नियमों में बदलावों के बारे में जानकारी दी।
अपडेटेड Oct 30, 2010 पर 15:35  |  स्रोत : Hindi.in.com

30 अक्टूबर 2010



सीएनबीसी आवाज़



1 अप्रैल 2011 से डीटीसी लागू होने के बाद मौजूदा आयकर नियमों में कुछ बदलाव आएंगे। टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया ने कुछ बदलावों के बारे में जानकारी दी है।


वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स छूट



आयकर की धारा 69 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को पीएफ, पीपीएफ, पेंशन फंड, ग्रेच्युटी फंड में 1 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलेगी। इसके अलावा आयकर कोड 70, 71, 72 के तहत जीवन बीमा, मेडिक्लेम और बच्चों की पढ़ाई पर 50,000 रुपये तक की कर छूट मिल सकती है।



हालांकि टैक्स गुरु का कहना है कि सीनियर सिटीजन हो जाने के बाद जीवन बीमा पॉलिसी मिलना, नए मेडिक्लेम कराना संभव नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से वरिष्ठ नागरिकों को बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिल पाएगा।



विरासत में मिले शेयर पर टैक्स



आयकर की धारा 49 के तहत अगर किसी व्यक्ति को अपने दिवंगत संबंधी से विरासत में शेयर मिलते हैं तो इस पर टैक्स तभी लगेगा, जब उन शेयरों को बेचा जाएगा। शेयर बेचने पर टैक्स उसी समयानुसार लगेगा जब शेयर वास्तव में खरीदे गए थे, ना कि वर्तमान कीमतों के हिसाब से।



एनआरआई पर टैक्स



टैक्स गुरु के मुताबिक विदेश में रहने वाले एनआरआई अगर भारत में पैसे भेजते हैं तो उनके ऊपर देश में कोई टैक्स नहीं लगेगा। जिस देश में आमदनी मिल रही है उसी देश में आयकर कानून के हिसाब से टैक्स देनदारी बनेगी।



एनआरआई द्वारा ब्लड रिलेटिव को भेजे गए उपहार, पूंजी पर टैक्स नहीं देना होगा। उस पूंजी से आप जो चाहें वो कर सकते हैं।



एजूकेशन लोन पर टैक्स छूट



टैक्स गुरु का कहना है कि नए टैक्स कोड में धारा 80 ई के तहत एजूकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स छूट जारी रहेगी। एजूकेशन लोन पर लगने वाले ब्याज को आपकी आय में से घटा दिया जाएगा। एक बात का ध्यान रखना होगा कि लोन के रिपेमेंट पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। एजूकेशन लोन भी चुनिंदा वित्तीय संस्थाओं. चैरिटी ट्रस्ट आदि से लिया जाना चाहिए।



शेयर के लेन-देन पर टैक्स छूट



सुभाष लखोटिया के अनुसार डीटीसी लागू होने के बाद शेयर खरीदने-बेचने के ब्रोकरेज और सर्विस टैक्स पर टैक्स छूट मिलती रहेगी, हालांकि सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स पर कर छूट नहीं मिलेगी।



टैक्स गुरु का कहना है कि आयकर भरने के लिए कारोबार का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। अपने कारोबार की कुल आमदनी में से खर्चा निकालकर उस पर टैक्स स्लैब के हिसाब से आयकर भरें।



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