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दिल से नहीं, दिमाग से करें निवेश

निलेश शाह का मानना है कि शेयर बाजार में निवेश करते वक्त दिमाग से फैसले लेने चाहिए, दिल से नहीं।
अपडेटेड Nov 18, 2010 पर 09:06  |  स्रोत : Hindi.in.com

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कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी स्टैटेजी के एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर, निलेश शाह का मानना है कि शेयर बाजार में निवेश करते वक्त दिमाग से फैसले लेने चाहिए, दिल से नहीं।



सवाल: आपने करियर की शुरुआत कहां की थी?



निलेश शाह: मैने कॉरपोरेट फाइनेंस से शुरुआत की थी। कॉरपोरेट फाइनेंस की वजह से मेरे करियर की नींव मजबूत हुई।


सवाल: आप अरविंद मिल्स के शेयर बेचते वक्त क्या सोच रहे थे?



निलेश शाह: लालभाई ग्रुप से मेरे परिवार का सालों से रिश्ता रहा है। अरविंद मिल्स अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। मुझे लगा कि शेयर ओवरवैल्यूड है, इसलिए मैंने अरविंद मिल्स के शेयर बेच दिए।

इस फैसले के बाद ही मुझे पता चला कि कारोबार करते वक्त मौके को खोना नहीं चाहिए।


सवाल: 1992 के हर्षद मेहता घोटाले पर आपका क्या कहना है?



निलेश शाह: साल 1992 मेरे लिए खास है। इसी साल मैने मैनेजमेंट का कोर्स पूरा किया था। देश में आर्थिक सुधार की ओर कदम भी इसी साल से शुरू किए गए थे। 1992 ऐतिहासिक साल है, जिसका मैने अनुभव लिया है।


सवाल: आपने कब शेयर बाजार की ओर रुख किया?



निलेश शाह: 1990 दशक के मध्य में भारतीय शेयर बाजार शुरुआती दौर में ही था। शेयर बाजार को करियर बनाने के बारे में शायद ही कोई सोचता होगा। बाजार में ब्रोकिंग हाउस और कुछ म्यूचुअल फंड ही थे।



कॉरपोरेट फाइनेंस में नौकरी करने से शेयर बाजार की रुख करने में आसानी हुई। लेकिन, उस समय मेरा ऐसा इरादा नहीं था।


सवाल: कोटक के उभरते पोर्टफोलियो मैनेजमेंट को संभालने का कैसा अनुभव रहा?



निलेश शाह: बाजार में भारी गिरावट आने के बाद कोटक ग्रुप ने पोर्टफोलियो कारोबार शुरू करने का फैसला किया। मैंने 20-25 करोड़ रुपये के साथ पोर्टफोलियो कारोबार की शुरुआत की थी।


सवाल: साल 2000 टेक्नोलॉजी शेयरों में आए भारी गिरावट से क्या आप चिंतित हुए थे?



निलेश शाह: जब मैंने पोर्टफोलियो कारोबार संभला, तब टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट शुरू हो चुकी थी। लेकिन,  टेक्नोलॉजी सेक्टर के एक्सपोजर से होने वाले पोर्टफोलियो को नुकसान को कम करना चुनौती भरा काम था। तब टेक्नोलॉजी शेयरों से दूर रहने का फैसला लेना मुश्किल था। बैंकिंग क्षेत्र में निवेश काफी फायदेमंद और सुरक्षित रहा।


सवाल: कमोडिटी बाजार का अनुभव कैसा रहा?



निलेश शाह: कमोडिटी में निवेश करने के 6-12 महीनों में सफलता से ग्राहकों और निवेशकों का भरोसा जीतना आसान हो गया था।


सवाल: निलेश शाह की निवेश रणनीति क्या है?



निलेश शाह: मैं हमेशा से ही बढ़ने की क्षमता दिखाने वाले सेक्टर और शेयरों में निवेश करता आया हूं। मैं जोश से भर उठता हूं, जब पैसा लगाई गई 100 करोड़ रुपये की कंपनी 5 सालों में 1,000 करोड़ रुपये की बन जाती है।



जब बाजार में गिरावट होती है, तो मैं कंपनी के मूल्यांकन पर जोर देता हूं। लेकिन, अच्छे दौर में अगली बड़ी कंपनी चुनना चुनौती भरा है। किसी कंपनी के पहले मैं सेक्टर को जांचता-परखता हूं और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आ रहे बदलावों को समझने की कोशिश करता हूं।



निवेश करने से पहले कंपनी के मैनेजमेंट से मिलने में मुझे ऐतराज नहीं है। पैंटालून रिटेल की योजनाओं के बारे में मैंने कंपनी से बातचीत की।


सवाल: आपके निवेश गुरु कौन हैं?



निलेश शाह: मैं वॉरेफ बुफे का काफी सम्मान करता हूं। उनसे मैंने दो बातें सीखीं हैं। पहला, निवेश के पहले ये जानना जरूरी है कि लंबी अवधि में कंपनी या सेक्टर का प्रदर्शन कैसा रहेगा। दूसरा निवेश का मार्जिन।



जम्मू एंड कश्मीर बैंक में निवेश करते वक्त मैंने दोनों बातें ध्यान रखीं। शेयर की कीमत 50 रुपये थी। वहीं, शेयर की बुक वैल्यू 180 रुपये थी।


सवाल: आप क्या करते हैं जब आपको निवेश करने के बाद नुकसान उठाना पड़े तो?



निलेश शाह: अगर कोई फैसला गलत हो जाता है, तो ज्यादा परेशान होना नहीं चाहिए। बल्कि, गलती से सीख लेनी चाहिए।



किसी खास घटना या बदलाव की उम्मीद में अगर निवेश किया है, तो नुकसान होने पर स्टॉपलॉस लगाकर बाहर हो जाना ही ठीक रहेगा। लेकिन, अगर लंबी अवधि में निवेश से फायदा मिलने की उम्मीद है, तो निवेश में बने रहें।


सवाल: शेयर से बाहर निकलना कैसे तय करें?



निलेश शाह: निवेश बाहर निकलने से पहले शेयर की वैल्यूएशन जांचे। लेकिन, लंबी अवधि का नजरिया भी रखें। साथ ही, आपको अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत की हलचल की जानकारी होना जरूरी है।


सवाल: आप अच्छे विश्लेषक में क्या देखते हैं?



निलेश शाह: मैं मानता हूं कि विश्लेषक को इक्विटी के बारे में जानकारी होनी चाहिए। लेकिन, फायदेमंद निवेश करने के लिए किसी विज्ञान की जरूरत नहीं है। सूझबूझ और सामान्य ज्ञान ही काफी है।