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कारोबार करते वक्त सेक्टर पर नजर

असित कोटिचा का कहना है कि अटकलों पर कारोबार करने से ज्यादा मुनाफा नहीं कमाया जा सकता है।
अपडेटेड Nov 18, 2010 पर 09:06  |  स्रोत : Hindi.in.com

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एएसके-रेमंड जेम्स के मैनेजिंग डायरेक्टर, असित कोटिचा का कहना है कि अनुभव बताते हैं कि अटकलों पर कारोबार करने से ज्यादा मुनाफा नहीं कमाया जा सकता है।



सवाल: आपकी शेयर बाजार में दिलचस्पी कैसे बनी?



असित कोटिचा: मेरे पिताजी शेयर बाजार में दिलचस्पी रखते थे। 1970 के दशक की बाजार में गिरावट से निराश होकर उन्होंने मुझको सारे शेयर बेचने को कहा। ऐसे मैने शेयर बाजार में पहला कदम रखा।


सवाल: क्या जेएम फाइनेंशियल के महेंद्रभाई कंपानी पहले व्यक्ति थे, जिनके लिए आपने काम करना शुरू किया?



असित कोटिचा: मेरे पिताजी ने मुझे महेंद्रभाई कंपानी से मिलावाया, जिन्होंने मेरा परिचय हेमेंद्र सेथ से करावाया। हेमेंद्र सेथ उस वक्त जेएम फाइनेंशियल में पोर्टफोलियो मैनेजर थे। मैं हेमेंद्र सेथ को अपना गुरु मानता हूं। उन्होंने मुझे कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ना सिखाया।


सवाल: जब आपने शेयर बाजार में पैसा लगाना शुरू किया, तब क्या आप सक्रिय कारोबारी थे?



असित कोटिचा
: शुरुआत दिनों में, मैं बाजार में पैसा निवेश के मुताबिक लगाता था। खाली समय में मुनाफे के लिए कारोबार करना शुरू किया था।


सवाल: क्या कारोबार से मुनाफा कमाया जा सकता है?



असित कोटिचा
: कारोबार से मुनाफा कमाना कभी मुमकिन और कभी नामुमकिन। 1999 में जब मैंने अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा की, तब मुझे पता चला कि कारोबार से ज्यादा मुनाफा नहीं मिल पाया है। क्योंकि किन्हीं शेयर में मुझे काफी फायदा हुआ, तो किन्हीं शेयर में भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। वहीं, निवेश पर काफी मुनाफा हुआ था।

साथ ही, छोटी अवधि में कारोबार करने से मार्जिन और शेयर की कीमत में अंतर को अपनी जेब से भरना पड़ाथा। इसके चलते मुझे कई अच्छे शेयरों को भी बेचना पड़ा था।


सवाल: आप पहले व्यक्ति थे जिसने सीमेंट शेयरों में बढ़त की संभावना देखी थी। ऐसा क्यों?



असित कोटिचा: उस समय सीमेंट शेयर काफी कम कीमतों पर मिल रहे थे। जैसे मद्रास सीमेंट के शेयर का भाव 300-400 रुपये के बीच था। जबकि, कंपनी का कैपिटल 3 करोड़ रुपये और मार्केट कैप 12 करोड़ रुपये था। कंपनी की उत्पादन क्षमता 18 लाख टन थी। मद्रास सीमेंट का मैनेजमेंट काफी अच्छा था और कंपनी की इकाइयां सीमेंट की भारी मांग वाले इलाकों के पास स्थित थीं।


सवाल: क्या आप पहले व्यक्ति थे, जिसने एसीसी में भारी उछाल का अंदाजा लगाया था?



असित कोटिचा: एसीसी में मैंने फॉर्वर्ड पोजिशन ली थी। वहीं, मैंने मद्रास सीमेंट में निवेश के लिए पैसा लगाया था। जब आप निवेश के लिए शेयर खरीदते हैं, तो कीमतों के उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर नहीं होता है। लेकिन, फॉर्वर्ड पोजिशन में शेयर कीमतें गिरने पर हर पखवाड़े बदला चुकाना पड़ता है। छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव की वजह से एसीसी में मुझे नुकसान उठाना पड़ा था।



पहले कुछ दिन एसीसी में उछाल रहा। लेकिन, बाद में कीमतों में लंबे समय तक गिरावट रही। इसकी वजह से मुझे ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाया। कीमतों की अंतर की भरपाई के लिए मुझको मद्रास सीमेंट के बड़े हिस्से को बेचना पड़ा था।


सवाल: एसीसी में हुए नुकसान से क्या आपकी शेयर बाजार में दिलचस्पी कम हुई थी?



असित कोटिचा
: एसीसी के अनुभव से मैंने सीखा कि लंबी अवधि का फायदा निवेश में मिलता है। अटकलों पर कारोबार में लंबी अवधि से नुकसान ही होता है।



सवाल: क्यो आपको 1992 घोटाले का अंदाजा था?



असित कोटिचा: काफी उद्योगपतियों और निवेशकों की ओर से चिंताएं उठ रहीं थीं। लेकिन, कारोबारियों को घोटाले की हवा तक नहीं लगी थी।



सवाल: वॉरेन बुफे के मुताबिक कारोबारियों के कुछ मनपसंद सेक्टर होते हैं। क्या आपके कुछ पसंदीदा सेक्टर हैं? या आप वक्त के मुताबिक शेयर चुनते हैं?



असित कोटिचा: काफी समय पहले मैंने किताब पढ़ी थी, जिसमें कंपनियों के विकास काल के बारे में बताया गया था। विकास काल कंपनी और सेक्टर के काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि, इसका कंपनी के मुनाफे और वैल्यूएशन पर असर पड़ता है।


सवाल: आप इंफोसिस, विप्रो और सत्यम में आई तेजी को भुना नहीं पाए। आपके लिए ये अनुभव कैसा था?



असित कोटिचा: वो काफी मुश्किल दौर था।


सवाल: क्या आप उदाहरण दे कर किसी सेक्टर के शेयरों में होने वाले बदलावों को समझाएं?



असित कोटिचा
: जैसे स्टील कंपनियों के लिए 5-7 साल काफी मुश्किल भरे रहे। इसका असर स्टील शेयरों पर भी दिखा। लेकिन, स्टील की मांग बढ़ने के साथ ही कंपनियों का मुनाफा और शेयरों की कीमतों में उछाल आया।


सवाल: आपने राधाकृष्णन दमानी और निमेश शाह से क्या सीखा?



असित कोटिचा
: निमेश शाह कंपनी से जुड़े सभी आंकड़ों को ध्यान से समझते और उनकी समीक्षा करते थे। वहीं, राधाकृष्णन दमानी अपने निवेश और ट्रेडिंग को अलग-अलग रखते थे।


सवाल: आपको किन का तरीका पसंद है?



असित कोटिचा: सबका कारोबार करने का तरीका अलग होता है। मैं सेक्टर और शेयरों में बदलावों को देखकर आगे का अनुमान लगता हूं।


सवाल: कौन से विदेशी निवेशक से आप प्रभावित हैं?



असित कोटिचा: वॉरेन बुफे दुनिया के बेहतरीन निवेशक हैं।


सवाल: इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को क्या राय देना चाहेंगे?



असित कोटिचा
: कारोबार करते वक्त जानकारी होना और लालच से बचना जरूरी है।


सवाल: माना जाता है कि 18 फीसदी के रिटर्न से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। क्या ये सही है



असित कोटिचा: हां, अच्छी कमाई के लिए ऊंचे रिटर्न का होना जरूरी नहीं है। कहां और कब निवेश करना है ये महत्वपूर्ण है।  


सवाल: अच्छे मैनेजमेंट के लिए क्या जरूरी है?

असित कोटिचा: अच्छे मैनेजमेंट के लिए सभी शेयरधारकों का हित ध्यान में रखना जरूरी है।


सवाल: क्या आपको लगता है कि दक्षिण भारत की कंपनियों के पास बेहतर मैनेजमेंट है?



असित कोटिचा: शुरुआती दौर में दक्षिण भारत की कंपनियां मैनेजमेंट के लिहाज से बेहतर लगती थीं। लेकिन, काफी रिसर्च के बाद पता चला है कि दक्षिण भारतीय कंपनियों पर भी काफी कर्ज है और मैनेजमेंट निवेशकों के हित को नजरअंदाज करते हैं।