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आईपीओ में निवेश के लिए पैसा कहां से लाएं?

बाजार में बढ़ते आईपीओ से रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिख रही है।
अपडेटेड Nov 18, 2010 पर 09:06  |  स्रोत : Hindi.in.com

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बाजार में बढ़ते आईपीओ से रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिख रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि रिटेल निवेश इश्यू में निवेश करने के लिए कहां से पैसे जुटाएं।

 
क्या आईपीओ में पैसा लगाने के लिए कर्ज मिल सकता है?



हां, आईपीओ में निवेश के लिए कर्ज मिल सकता है। ज्यादातर बैंक आईपीओ के लिए कर्ज देते हैं, लेकिन कुल रकम का आधा फीसदी ही बैंक दे पाएंगे। अगर आपको इश्यू में निवेश करने के लिए 10,000 रुपये की जरूरत है, तो बैंक सिर्फ 5,000 रुपये का ही कर्ज देगा। बाकी रकम का इंतजाम आपको खुद ही करना पड़ेगा। आईपीओ निवेश के कर्ज के लिए 50 फीसदी की सीमा भारतीय रिजर्व बैंक ने तय की है। इसलिए सभी बैंकों 50 फीसदी से ज्यादा कर्ज नहीं देंगे।



बैंक ऑफ इंडिया के पी पी जैन के मुताबिक आईपीओ निवेश के लिए कर्ज लेना आसान है। जिस बैंक से आप कर्ज लेना चाहते हैं, उसमें पहले डीमैट खाता खुलवाना पड़ेगा। इसके बाद आपको सिर्फ अपने हिस्से की राशि डीमैट खाते में जमा करनी है। आईपीओ के लिए आवेदन की बाकी प्रक्रिया बैंक पूरी करेगा।


 
आईपीओ के लिए कंपनी के पास आवेदन भेजने की जिम्मेदारी बैंक की होती है। आपको बस पैसों के साथ आवेदन पत्र बैंक को देना पड़ता है। बैंक आपकी दी हुई रकम में कर्ज की राशि जोड़ कर आवेदन पत्र के साथ कंपनी के पास भेजेगा।



कर्ज देने वाली बैंक में ही डीमैट खाता खुलवाना जरूरी है, क्योंकि आईपीओ में मिले हुए शेयर बैंक के दिए गए कर्ज की सिक्योरिटी का काम करते हैं। कर्ज की रकम चुकाने तक आपके शेयर बैंक के पास ही रहेंगे।


आईपीओ निवेश के कर्ज की नियम और शर्तें -



योग्यता:


   
- पैन नंबर
- बैंक में डीमैट खाता


जरूरी कागजात:

- पहचान पत्र
- निवास प्रमाण पत्र
- कर्ज के लिए आवेदन पत्र
- आईपीओ के लिए आवेदन पत्र
- डीमैट खाता खुलवाने के कागजात



कर्ज की सीमा:



- निवेश की राशि का 50 फीसदी (आरबीआई द्वारा तय)
   
ब्याज दर:

- सालाना 9-15 फीसदी (बैंक पर निर्भर)

कर्ज की अवधि:
   
- 21 से 60 दिन (बैंक पर निर्भर)



क्या हर आईपीओ निवेश के लिए कर्ज मिल सकता है?



कर्ज देते वक्त बैंक आईपीओ लाने वाली कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा करता है। साथ ही, बैंक आईपीओ से जुड़े हुए जोखिमों की भी समीक्षा करता है। हर बैंक में आईपीओ कर्ज के लिए अलग अलग मापदंड होते हैं।



आईडीबीआई बैंक के डीमैट सर्विस और कैपिटल मार्केट्स के हेड, कौशिक बागची के मुताबिक आईपीओ के फायदे-नुकसान के आधार पर बैंक कर्ज देती है। इसलिए जरूरी नहीं है, कि हर आईपीओ में निवेश के लिए आपको बैंकों से कर्ज मिले।



कर्ज की सीमा 50 फीसदी होने से ज्यादातर बैंकों का मानना है कि आईपीओ कर्ज के साथ ज्यादा जोखिम नहीं जुड़ा होता है। अगर शेयर इश्यू प्राइस से कम कीमत पर सूचीबद्ध होता भी है, तब भी मार्जिन की रकम से बैंक घाटा निकाल सकते हैं। लिस्टिंग भाव काफी कम होने पर ही बैंकों को घाटा उठाना पड़ सकता है।


कर्ज की राशि नहीं चुकाने पर क्या बैंक शेयर बेच सकती है?


 
कौशिक बागची का कहना है कि बैंक इस तरह के जोखिम से बचने के लिए अपने ही बैंक में डीमैट खाता खुलवाते हैं। अगर निवेशक कर्ज की रकम नहीं चुकाता है, तो बैंक शेयर अपने पास रख सकते हैं।



कर्ज लेते वक्त बैंक निवेशक से शेयर की डिलीवरी और रीफंड के लिए कागजात भी भरवाते हैं, जिससे आईपीओ में मिले शेयर निवेशक को न मिलकर, बैंक के पास जमा हो जाते हैं। 

 
आईपीओ में शेयर न मिलने या कुछ शेयर मिलने की स्थिति में क्या होता है?



अगर आईपीओ में निवेशक को शेयर नहीं मिलते हैं, तो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की ओर बैंक को रीफंड मिल जाता है। निवेशक को ब्याज के साथ कर्ज की राशि चुकानी पड़ती है।


 
देखा जाए तो आईपीओ में निवेश के लिए बैंक से कर्ज लेना आसान है। बैंक आईपीओ से जुड़े जोखिम को देखकर ही कर्ज देने या न देने का फैसला लेते हैं।