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पोर्टफोलियो में कितने म्युचुअल फंड स्कीम हैं जरूरी!

पोर्टफोलियो में कितने म्युचुअल फंड स्कीम को जगह मिलनी चाहिए ये सुनिश्चित करने के लिए इन बातों का पालन करें।
अपडेटेड Nov 20, 2010 पर 13:54  |  स्रोत : Hindi.in.com

20 नवंबर 2010



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आपके पोर्टफोलियो में कितने म्युचुअल फंड स्कीम को जगह मिलनी चाहिए इस बात को सुनिश्चित करने के लिए आगे बताई गई बातों का पालन करें।



निवेशक की नजर डाइवर्सिफिकेशन, जोखिम को कम करने और बाजार से बेहतर रिटर्न हासिल करने पर लगी रहती है। लिहाजा नियमित निवेशकों के लिए दो प्रकार की एसेट क्लास मौजूद हैं - इक्विटी और डेट। यदि कोई निवेशक बेहतर डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाना चाहता है तो इसमें इक्विटी और डेट का समावेश होना बेहद जरूरी है। आपको इस मिश्रण से पोर्टफोलियो में 2 म्युचुअल फंड स्कीम जोड़ने में मदद मिलेगी।



इक्विटी स्कीम



जब आप डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड में निवेश करते हैं तो आपको फंड हाउस और फंड मैनेजर पर भरोसा करना काफी जरूरी है। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि किसी भी फंड का पिछला प्रदर्शन आनेवाले दिनों के प्रदर्शन की झलन नहीं हो सकता है।



फंड हाउस, उसके फंड को लेकर कई तरह के बदलाव कर सकता है और फंड मैनेजर किसी अन्य जगह जा सकता है या मान लीजिए कि पूरा साल ही उसके लिए असफलता भरा हो सकता है। ऐसे में एक से ज्यादा इक्विटी स्कीम में निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है।



लिहाजा इसी सलाह पर पोर्टफोलियो में दो इक्विटी स्कीम को शामिल करने की राह तैयार होती है। साथ ही दो फंडों में निवेश करने की वजह से एक फंड से टैक्स-सेविंग का लाभ मिलता है तो दूसरे से रेगुलर निवेश का लाभ।



डेट स्कीम



जोखिम कम करने और डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए डेट स्कीम में निवेश किया जाता है। डेट स्कीम में फंड मैनेजर के प्रदर्शन से कोई खास असर नहीं पड़ता है। ब्याज दरों की उठापटक पर डेट स्कीम के रिटर्न आधारित होते हैं। डेट स्कीम में निवेश करने के लिहाज से एक शॉर्ट टर्म और एक लॉन्ग टर्म, इसप्रकार दो डेट स्कीम में निवेश कर सकते हैं।



एसेट को एलोकेट कैसे करें



इसप्रकार एक अच्छे पोर्टफोलियो में शामिल करने के लिए स्कीम की संख्या हमें मिल गई है जो 4 है। हालांकि अब ये जानने की कोशिश करते हैं कि अधिकतम संख्या कितन हो सकती है। हम जानते हैं कि ज्यादा परेशानी का सामना करने से बेहतर कितन फंडों को शामिल करने से पोर्टफोलियो बेहतर बन सकता है।



वित्तीय सलाहकार शंकर भट्ट का कहना है कि किसी भी पोर्टफोलियो में 7 से अधिक फंडों का समावेश करना हानिकारक साबित हो सकता है। इसके अलावा 5 या 6 की संख्या भी बेहतर कही जा सकती है।



दरअसल 7 से अधिक की संख्या में फंडों को पोर्टफोलियो में शामिल करने से इनको ट्रैक करना और इनमें लगातार निवेश करने, दोनों प्रक्रियाओं के लिए बाधा बन जाती है। हालांकि शंकर भट्ट का मानना है कि पोर्टफोलियो में फंडों को शामिल करने के बाद इनमें लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना चाहिए।



कैसे बढ़े म्युचुअल फंड की राह में आगे



1. पोर्टफोलियो में शामिल किए गए सभी फंडों के नाम याद रखें
2. वित्तीय खबरों पर नजर बनाएं रखें



इन बातों पर अमल करने से आपके पोर्टफोलियो में यथायोग्य बदलाव किए जाने के आसार बनते हैं तो उस पर आसानी के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।



शंकर भट्ट के मुताबिक केवल पोर्टफोलियो में फंड शामिल किए जाने से बात नहीं बनेगी। लिहाजा किस फंड में कितने पैसे और किस मात्रा में रखने हैं, इसकी जानकारी हासिल करने के बाद ही आगे बढ़ें।



इस बात को याद रखें कि यदि आपके पोर्टफोलियो में फंडों की संख्या बढ़ती है तो आपको इन फंडों पर नजर बनाएं रखने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में 4-7 फंडों में निवेश करते हुए अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।



इस म्युचुअल फंड लेख की लेखिका श्रीकांत मीनाक्षी हैं