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क्यों निवेश को डाइवर्सिफाई करने की जरूरत है!

अपने निवेश को डाइवर्सिफाइ करने से आपके पोर्टफोलियो में जोखिम कम हो जाता है। ये जानने के लिए पढ़िए आगे -
अपडेटेड Nov 27, 2010 पर 16:53  |  स्रोत : Hindi.in.com

27 नवंबर 2010



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अपने निवेश को डाइवर्सिफाइ करने से आपके पोर्टफोलियो में जोखिम कम हो जाता है। ये जानने के लिए पढ़िए आगे -



दो प्रकार एसेट हैं ए और बी। दोनों एसेट में 10 फीसदी रिटर्न देने की संभावना है और 20 फीसदी तक परिवर्तन देखा जा सकता है। गौरतलब है कि दोनों एसेट में कोई असमानता नहीं है। एसेट ए की एसेट बी पर कोई निर्भरता नहीं है।



मान लीजिए कि आप दोनों में एसेट में एकसमान रकम का निवेश करते हैं। आपको 10 फीसदी रिटर्न हासिल करने की संभावना है। हालांकि, दो असमान एसेट में निवेश करने की वजह से आपका जोखिम का दायर बढ़ रहा है लेकिन निवेश 14.1 फीसदी की दर से वर्गीकृत हो रहा है।



14.1 फीसदी की दर से रिटर्न के वर्गीकृत होने की वजह जानने के लिए नीच बताई गई बातों पर गौर करें।



आप बिना अपने रिटर्न को कम करते हुए अपने पोर्टफोलियो के जोखिम को कम कर सकते हैं जिसके लिए पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड करना होगा। अब दो एसेट चुनते हैं जिनका रिटर्न एकसमान नहीं होगा, जैसा कि शेयर ए में फार्मा शामिल करेंगे और शेयर बी में सॉफ्टवेयर कंपनी को शामिल करेंगे। ऐसे में आप पोर्टफोलियो के जोखिम को कम कर सकेंगे।



अपने निवेश की योजना बनाते समय दो बातें जेहन में रखना बेहद जरूरी है -



1. प्रत्येक एसेट के जोखिम जुड़ा रहता है।

2. सभी निवेश एक ही एसेट में न करें।



कई एसेट में निवेश को डाइवर्सिफाइ किए जाने से आपको हासिल होनेवाले रिटर्न में जोखिम कम हो जाता है। ऐसे में आपको एसेट के रिटर्न की गणना करने की जरूरत भी नहीं पड़ती है, लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि आप पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइ कर रहे हैं तो आपके संपूर्ण पोर्टफोलियो में जोखिम कम हो जाता है।



जोखिम को कम करने का लाभ उठाना है तो आप पोर्टफोलियो के एसेट को विभिन्य निवेशों में पैसे लगाएं और जिसका रिटर्न 100 फीसदी एकसमान न हो इस बात का भी ध्यान रखें। विभिन्न एसेट स्वयं ही विविध एसेट श्रेणियों में तब्दील होते चले जाएंगे जैसे कि फिक्सड इनकम, इक्विटी, रियल एस्टेट, गोल्ड साथ ही अन्य निवेश विकल्पों में भी पैसे लगाएं जा सकते हैं।



मान लीजिए कि आप इक्विटी शेयरों में पैसे लगाते हैं तो आपका निवेश विभिन्न सेक्टर की कंपनियों या फिक्सड इनकम निवेश वाली कंपनियां, कुछ सरकारी जोखिम और कुछ कार्पोरेट जोखिम के अंतर्गत वर्गीकृत हो जाता है।



लिहाजा ध्यान रखें कि अपने निवेश को 15-20 विभिन्न एसेट में वर्गीकृत करें।