आवाज अड्डाः यूपी में नकल पर नकेल, शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार! -
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आवाज अड्डाः यूपी में नकल पर नकेल, शिक्षा व्यवस्था में होगा सुधार!

प्रकाशित Fri, 09, 2018 पर 20:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

उत्तर प्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षा के दूसरे दिन करीब 10 फीसदी छात्र परीक्षा देने नहीं आए। ताजा जानकारी के मुताबिक चौथे दिन तक 10 लाख 66 हजार छात्र परीक्षा छोड़ चुके हैं। वजह ये है कि योगी सरकार ने इस बार परीक्षा में जबर्दस्त कड़ाई कर दी है। सीसीटीवी और नकल पकड़ने वाले उड़नदस्तों का खौफ इस कदर हावी है कि परीक्षा देने वालों की संख्या रोज-रोज घटती जा रही है। सवाल उठता है कि क्या इतनी बड़ी संख्या में छात्र नकल के भरोसे परीक्षा देने आते हैं। इतनी बड़ी धांधली आखिर कैसे चलती रही है? लेकिन सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि इस कड़ाई के खिलाफ भी आवाज उठ रही है।


उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं। इस बार कुल 66 लाख 37 हजार विद्यार्थी परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन इसमें से लगभग साढ़े 6 लाख छात्रों ने दूसरे दिन ही परीक्षा छोड़ दी। और इसकी वजह है नकल पर नकेल और कड़ाई से परीक्षा का संचालन। नियम कानून तो वही पुराने हैं लेकिन परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, नकलचियों को पकड़ने के लिए उड़दस्ते बनाए गए हैं, यूपी एसटीएफ को भी अभियान पर लगाया गया है। और जिन केंद्रों पर ज्यादा नकल की शिकायत थी, उन्हें रद्द कर दिया गया है। लेकिन विपक्ष योगी सरकार की इस कड़ाई को प्रचार का तरीका बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि पढ़ाई में सुधार किए बगैर कड़ाई करना छात्रों के साथ नाइंसाफी है।


लेकिन योगी सरकार इस तरह की आलोचना का ज्यादा महत्व देने को तैयार नहीं है। सरकार का कहना है कि नकल पर ढिलाई का मतलब है, मेधावी छात्रों के साथ नाइंसाफी और अयोग्यता को बढ़ावा देना, जो उसे मंजूर नहीं है।


सवाल उठता है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर छात्र अपने दुस्साहस से नकल करते हैं या फिर शिक्षा माफिया की शह पर परीक्षा में धांधली होती है? सवाल ये भी है कि ऐसी परीक्षा से तैयार होने वाले डिग्रीधारी आगे चलकर क्या गुल खिलाएंगे?