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आवाज़ अड्डाः कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी, फिर शुरू हुई राजनीति

प्रकाशित Wed, 28, 2018 पर 20:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच भ्रष्टाचार पर तू-तू-मैं-मै शुरू हो गई है। कांग्रेस ने इसे नीरव मोदी, माल्या और जयेश शाह के मामलों से ध्यान बांटने का तरीका बताया है, तो बीजेपी ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीति को ढाल बनाना गलत है। बीजेपी नेता सुब्रमणियन स्वामी ने तो यहां तक कह दिया कि अब पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की बारी है।


कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी के साथ ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भ्रष्टाचार पर राजनीतिक जंग का एक और अध्याय शुरू हो गया है। पूरी संभावना है कि सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के दूसरे हिस्से में इसका असर देखने को मिलेगा। विपक्ष जहां बीजेपी पर भ्रष्टाचार को लेकर सेलेक्टिव होने का आरोप लगा रहा है तो कांग्रेस ने कार्तिक की गिरफ्तारी को सीधे-सीधे नीरव मोदी जैसे मामलों से ध्यान भटकाने का टैक्टिक्स बताया है।


लेकिन सरकार कह रही है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीति के चश्मे से देखना ठीक नहीं है।


कार्ति चिदंबरम पर सीबीआई का आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के प्रभाव का इस्तेमाल कर आईएनएक्स मीडिया में गलत तरीके से किए 305 करोड़ के विदेशी निवेश को मंजूरी दिलवाई। इसके एवज में उन्होंने अपनी कंपनियों के जरिए आईएनएक्स मीडिया के मालिकों से करोड़ो रुपए लिए। चुंकि वो जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। लेकिन पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बेटे का बचाव करते हुए एक बयान जारी कर कहा है कि आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी देना उनका अकेले का नहीं बल्कि एफआईपीबी का सामूहिक निर्णय था। जबकि मामले को व्यक्तिगत तौर पर आगे बढ़ा रहे बीजेपी नेता सुब्रमणियन स्वामी का कहना है कि कार्ति के बाद पी चिदंबरम की बारी आएगी और भ्रष्टाचार के मामलों में कांग्रेस के बहुत से नेता जेल जाएंगे।


तो क्या वाकई चुनाव से पहले कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार का भूत एक बार फिर जागने वाला है और इसका पहला शिकार पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम होंगे? और 2019 में फिर बीजेपी भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाएगी?