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टैक्स गुरुः समझें स्टैंडर्ड डिडक्शन का गणित, कैसे होगा क्लेम

प्रकाशित Thu, 01, 2018 पर 09:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट अमिताभ सिंह की सलाह।


बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव के बाद इसे हासिल करने के लिए टैक्सपेयर्स क्या करें इस पर बात अमिताभ सिंह का कहना है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन से सैलरीज क्साल को बड़ा फायदा मिल सकता है। 12 साल पुरानी टैक्स व्यवस्था फिर से लागू हुई है। इसमें न्यूनतम 40000 सैलेरी होने पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलेगा। हालांकि 15000 रुपये के मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा खत्म हो जायेगी। साथ ही नए नियम के तहत 19200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस पर भी छूट खत्म की गई है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत अधिकतम 5800 रुपये की छूट मिलेगी।


उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि 40000 रुपये पाने के लिए अलग से क्लेम भरने की जरुरत नहीं है। इनकम टैक्स के फॉर्म 16 में इसकी जानकारी दी गई है।


सवालः प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं, बिजनेस से कमीशन आय भी होती है। क्या इन दोनों आय में 40000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिल सकता है।


अमिताभ सिंहः कमीशन आय पर स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलता है। कमीशन को बिजनेस आय माना जाता है। न्यूनतम 40000 रुपये सैलरी होने पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलेगा।