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साइबर फॉर्ड का बढ़ता मामला, कैसे बचाएं अपना पैसा

प्रकाशित Thu, 01, 2018 पर 13:57  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कैशलेस इकोनॉमी की ओर हमारा सपना तब ही पूरा होगा जब हम ऑनलाइन या साइबर फ्रॉड से निजात पा लेंगें। डेबिट, क्रेडिट या ऑनलाइन लेनदेन को लेकर ठगी या धोखाधडी के मसलों में मार्च से लेकर दिसंबर 2017 तक 1 लाख 20 हजार तक का आंकडा छु लिया है। फोन के जरिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या ई वॉलेट के इस्तेमाल पर फ्रॉड के मसले पर सरकार ने भी चिंता जताई है। सिर्फ यही नही, बैंकों के एटीएम में से क्लोनिंग के जरिए आपके पैसे निकाल लिए जा रहे हैं। योर मनी आज आपको साइबर फ्रॉड को पहचान ने, और उस से बचने के उपाए बताएगा। और मेरे साथ इसमें खास पेशकश में शामिल हो रहे हैं फाइनेंशियल प्लानर अर्णव पंड्या और एसआईएसए के वाइस प्रेसीडेंट नितिन भटनागर।


जानकारों का कहना है कि इंटरनेट पर होनेवाली धोखाधड़ी को है डिजिटल फ्रॉड कहलाता है। ईमेल स्पैम और ऑनलाइन स्कैम के रूप में फर्जीवाड़ा होती है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड के मामले सामने आये है। वहीं हरियाणा, कर्नाटक और तमिलनाडु भी फर्जीवाड़े में शामिल है।


जानकारों के मुताबिक डिजिटल फ्रॉड की धोखाधड़ी डेबिट या क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग से होता है। बैंक अफसर बनकर फर्जी कॉल से ठगी की जाती है। फेक ईमेल, ईमेल्स पर अटैचमेंट में वाइरस और पैसे ट्रांसफर करने वाले फेक साइट के जरिए धोखाधड़ी की जाती है। मैन इन मिडल अटैक, ग्राहक और मर्चेंट के बीच लेनदेन को हैक किया जाता है। हैकर लॉग इन और पासवर्ड की जानकारी चुराते हैं।


अब आपको अपने साथ हुए किसी डिजिटल बैंक फ्रॉड के बारे में 3 दिन के भीतर बैंक को बताना होगा। बैंक फ्रॉड की रकम की भरपाई करेंगे। अगर 4 से 7 दिन में जानकारी दी तो पूरी भरपाई नहीं होगी। बैंक सिर्फ 25,000 रुपये तक की भरपाई करेंगे। 7 दिन के बाद जानकारी देने पर भरपाई बैंक पर निर्भर करेगी।


जानकारों का कहना है कि साइबर फ्रॉड से बचने के लिए ऑनलाइन भुगतान करते वक्त वेबसाइट पर पीसीआई-डीएसएस का सर्टिफिकेट देखें। मोबाइल ऐप से भुगतान के वक्त पेसेक का लोगो देखें। पेसेक के लोगों पर क्लिक करने से वैधता सर्टिफिकेट दिखेगा। अनजान व्यक्ति के ई-मेल में आए लिंक और अटैचमेंट को ना खोलें। सिस्टम, मोबाइल में एंटी वायरस, स्पैम फिल्टर, एंटी स्पायवेयर लगाएं। अपने अकाउंट बैलेंस को नियमित रूप से देखते रहें। अपने लॉग इन और सिक्योरिटी कोड किसी को ना बताएं। ऑनलाइन बैंकिंग का यूजर आईडी और पासवर्ड पेचीदा बनाएं। पब्लिक वाई-फाई पर मोबाइल वॉलेट, बैंकिंग ऐप ना खोलें।