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आवाज़ अड्डा: कुरान, कंप्यूटर के जरिए क्या संदेश दे रहे मोदी!

प्रकाशित Thu, 01, 2018 पर 20:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज दिल्ली में इस्लामिक स्कॉलर कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। यहां पीएम ने इस्लाम और मुसलमानों को लेकर अपनी राय रखी। पीएम ने कहा वो चाहते हैं कि मुसलमानों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कम्प्यूटर हो। पीएम मोदी के साथ कॉन्फ्रेंस में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला-द्वितीय ने भी हिस्सा लिया। कई देशों के इस्लामिक विद्वान भी इस्लामिक कॉन्फ्रेंस में पहुंचे।


इस्लामिक हेरिटेज कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण। साथ में एक खास मेहमान जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला जिन्होंने मजहब के नाम पर हो रहे आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ पूरी दुनिया में मुहिम छेड़ रखी है। प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम नौजवानों को तरक्की और विकास के रास्ते पर चलने की नसीहत दी। पिछले 1 साल में मोदी सरकार ने मुसलमान वोटरों को लुभाने के लिए कई कदम उठाए हैं। कहा जा रहा है कि 2019 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमानों के साथ अपना कनेक्ट बढ़ा रहे हैं।


इस्लामिक स्कॉलर कॉन्फ्रेंस में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला सेकेंड के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्लिम युवाओं को ये नया संदेश दिया। किंग अब्दुल्ला इस्लाम के उदार चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। इस्लामिक विरासत पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने मुसलमानों के जख्मों पर मरहम लगाने की भी कोशिश की। मोदी ने कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ मुहिम किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है।


कहा जा रहा है कि 2019 में दोबारा जीत का परचम लहराने के लिए बीजेपी मुसलमानों का दिल जीतने की कोशिश कर रही है। सरकार ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ बिल लाकर मुस्लिम महिलाओं को बड़ी राहत दी है। सरकार के इस कदम की तारीफ भी हो रही है। मोदी ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी मस्जिद में जाकर मुस्लिम विरोधी छवि तोड़ने की कोशिश की। मोदी के ताजा बयान को भी मुस्लिम स्कॉलर पॉजिटिव मानते हैं।


आने वाले महीनों में कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या तरक्की और विकास की बात करके मोदी मुसलमानों का भरोसा जीत पाएंगे। सवाल ये भी है कि क्या मुसलमानों का जो बड़ा तबका विकास की दौड़ में पीछे छूट गया है उसको सहारा देने के लिए जमीनी स्तर पर काम भी हो रहा है? इन्ही सवालों के जवाब खोजने की कोशिश है आज का आवाज़ अड्डा।