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एफएसएसएआई के डाइट फॉर लाइफ प्रोग्राम पर विवाद

प्रकाशित Sat, 03, 2018 पर 14:00  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई की एक पहल विवादों में आ गई है। एफएसएसएआई पर अपने डाइट फॉर लाइफ प्रोग्राम के तहत कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा है। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने एफएसएसएआई को तलब किया है।


एफएसएसएआई का डाइट फॉर लाइफ प्रोग्राम नवजात बच्चों के डिसऑर्डर इनबॉर्न एरर ऑफ मेटाबोलिज्म के इलाज के लिए भारत में भी आहार उपलब्ध कराने के लिए किया गया था । इसके लिए एफएसएसएआई ने नेस्ले, एबॉट, मीड जॉनसन और डेनन के साथ हाथ मिलाया था। लेकिन यही समझौता विवादों की जड़ बन गया। स्वदेशी जागरण मंच ने एफएसएसएआई पर विदेशी कंपनियों के लिए नियमों में अनदेखी करने का आरोप लगाया है। जानकारों का भी कहना है कि इस कार्यक्रम में मां के दूध के बजाय बेबी फूड को बढ़ावा दिया जा रहा है जो नियमों के खिलाफ है।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एफएसएसएआई से इन आरोपों का जवाब देने को कहा है। हालांकि एफएसएसएआई ने अपनी सफाई में कहा है कि इस कार्यक्रम के बिना आईईएम से पीड़ित बच्चों को बचाना आसान नहीं है। बेबी फूड के पैकेट पर मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है लिखना जरूरी होता है। लेकिन इस खास बीमारी में नवजात मां के दूध को भी नहीं पचा पाता है। इसलिए पैकेट पर ये बात नहीं लिखी जा सकती। अब इस विवाद से डाइट फॉर लाइफ प्रोग्राम पर संकट तो आ ही गया है।