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घोटालों से बैंकों की साख पर बट्टा: लोकल सर्किल्स

प्रकाशित Tue, 06, 2018 पर 11:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पीएनबी बैंक घपला और दूसरे बैंकों के लोन डिफॉल्ट से सरकारी बैंकों की साख पर काफी बट्टा लगा है। इसी मुद्दे पर लोकल सर्किल्स ने एक सर्वे किया जिसमें बैंकों के बारे में लोगों से राय मांगी गई है। इस सर्वे में पहला सवाल पूछा गया कि कारोबारी और सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की मिलभगत से भ्रष्टाचार कितना सामान्य है तो 53 फीसदी लोगों ने इसे आम बताया बताया तो 43 फीसदी लोगों ने कर्ज से जुड़े मामलों में ही भ्रष्टाचार को सामान्य बताय। 1 फीसदी लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता तो 3 फीसदी लोगों ने कहा कि वो इस बारे में कुछ कह नहीं सकते।


वहीं दूसरा सवाल था कि सरकारी बैंकों को दुरुस्त करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है तो इसके जवाब में 52 फीसदी लोगों ने कहा कि प्रभावी निगरानी हो तो वहीं 13 फीसदी लोगों ने कहा कि टॉप निजी बैंकों के मैनेजमेंट को शामिल करके। वहीं 32 फीसदी लोगों ने कहा कि निजीकरण से बैंकों की सेहत दुरुस्त हो सकती है। 3 फीसदी लोगों ने कहा कि वो कुछ कह नहीं सकते।


तीसरा सवाल ये था कि क्या बैंकों को लोन डिफॉल्टर्स का पासपोर्ट गिरवी रखना चाहिए और कर्ज के हिसाब से विदेश जाने के लिए पासपोर्ट देना चाहिए। 67 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया जबकि 27 फीसदी लोगों ने नहीं में जवाब दिया तो वहीं 6 फीसदी लोगों ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।


चौथा सवाल था कि क्या लोग सरकारी खातों में पैसा जमा करना सुरक्षित समझते हैं तो सर्वे में ये बात सामने आई कि सिर्फ 35 फीसदी लोग ही सुरक्षित महसूस करते हैं। वहीं 16 फीसदी लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते और निजी बैंकों में जाने का प्लान कर रहे हैं। 8 फीसदी लोग गोल्ड और प्रॉपर्टी में निवेश करने पर विचार कर रही है। वहीं 41 फीसदी लोगों का मानना है कि बैंक खाते में पैसे सुरक्षित नहीं हैं लेकिन अभी उनके पास इससे बढ़िया कोई विकल्प नहीं है।