आवाज़ अड्डाः खाली होगा सरकारी घर, बंद होगी बंगलों की बंदरबांट! -
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आवाज़ अड्डाः खाली होगा सरकारी घर, बंद होगी बंगलों की बंदरबांट!

प्रकाशित Tue, 08, 2018 पर 08:10  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सारे पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले खाली कराने का आदेश दिया है। 2016 में भी कोर्ट ने इसी तरह का फैसला दिया था, लेकिन तब यूपी सरकार ने ये फैसला लागू करने की बजाए बंगलों की सुविधा को कानूनी रूप दे दिया था। अब उस कानून को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। एक बार फिर गेंद यूपी सरकार के पाले में है। लेकिन इसी मुकद्दमे के दौरान ये बात भी उठी कि सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री क्यों, पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और इस तरह के तमाम पदों से होकर गुजरने वालों को तरह-तरह की सुविधाएं क्यों दी जाए? यानि तय है कि बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी


सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से लखनऊ में 7 महलनुमा बंगले खाली हो जाएंगे। जिन्हें सरकारी बंगले छोड़ना पड़ेगा उन पूर्व मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं-अखिलेश यादव, मायावती, मुलायम सिंह यादव, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, रामनरेश यादव और नारायण दत्त तिवारी। असल में सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में ही पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला देने को गलत करार दिया था और महीने भर में ऐसे बंगले खाली कराने का आदेश भी दिया था। लेकिन तब अखिलेश यादव सरकार ने अध्यादेश के जरिए इसे कानूनी रूप दे दिया और बंगलों पर नेताओं का कब्जा बना रहा। लेकिन मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले एनजीओ लोक प्रहरी ने नए कानून को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी और फैसला सामने है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि राजनेता इसे पूरे मन से लागू करते हैं या फिर से बचाव का रास्ता ढूंढते हैं।  


याचिका की सुनवाई के यूपी के अलावा दूसरे राज्यों में इस तरह की सुविधा का सवाल भी उठा था। कोर्ट से एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमणियम ने भी कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों ही क्यों, पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री से भी ये सुविधा वापस ले लेनी चाहिए। कोर्ट ने इसे संविधान की भावनाओं के विपरीत भी माना है। ऐसे में पूरे देश में पद से हटने के बाद नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर बहस की गुंजाइश बनती है। 
 
लेकिन सवाल उठता है कि क्या कोर्ट के इस फैसले को राजनेता आसानी से पचा पाएंगे या एक बार फिर इसकी काट ढूंढी जाएगी? बड़े पदों पर रह चुके नेताओं को सुविधा देने के पीछे कभी सुरक्षा का तर्क दिया जाता है तो कभी सम्मान का। लेकिन जब कोर्ट ने ऐसी सुविधा को संविधान की भावना के खिलाफ बताया है तो क्या अब इस तरह की तमाम सुविधाएं खत्म कर देनी चाहिए?