पहरेदारः इंश्योरेंस कंपनी की गलती, परेशान कंज्यूमर -
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पहरेदारः इंश्योरेंस कंपनी की गलती, परेशान कंज्यूमर

प्रकाशित Tue, 08, 2018 पर 13:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सीएनबीसी-आवाज़ पर आने वाला टीवी का सबसे बड़ा कंज्यूमर शो पहरेदार ग्राहक की आवाज़ बुलंद करता है और लड़ता है ग्राहक के हक की लड़ाई। जब कंपनियों की मनमानी के सामने कंज्यूमर झुकने लगता है, तब उनके हक की आवाज़ लेकर पहरेदार करता है कंपनी से सवाल और कंपनी को देना होता है जवाब।


पहरेदार के जरिए उन लोगों को इंसाफ मिल पाता है जो कंपनियों के अड़ियल रवैये के चलते उन जरूरी सर्विसेज से महरूम रह जाते हैं जो उनका हक है। पहरेदार उन कंपनियों को भी सबक सिखाता है जो वादे तो कर देती हैं लेकिन उन्हें पूरे करने में आनाकानी करती हैं।


इस बार हमारे रडार पर है इंश्योरेंस कंपनी की वादाखिलाफी। कोलकता के गौरव का कहना है कि मैक्स बूपा की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी साल 2011 में ली थी। सितंबर 2017 तक मैक्स बूपा की पॉलिसी को जारी रखा था। एजेंट सोविक कुंडू के जरिए पॉलिसी कराई थी। पिछले साल एजेंट ने मैक्स बूपा से रेलिगेयर में नौकरी बदली है। एजेंट सोविक कुंडू ने रेलिगेयर में पोर्ट करने की सलाह दी है। माता-पिता ने विश्वास कर पॉलिसी को रेलिगेयर में पोर्ट किया। हमेशा पॉलिसी के प्रीमियम वक्त पर भरें। एजेंट के कहने पर तीन साल का प्रीमियम एक बार में भरा। विदेश में रहने की वजह से माता-पिता की पॉलिसी करवाई। परिवार की सलामती के लिए साल 2020 तक का प्रीमियम भरा। इंश्योरेंस कंपनी से कैशलेस क्लेम की मांग की पर कंपनी ने इनकार किया।


रेलिगेयर के कर्मचारी ने आईसीयू में मां से पूछताछ की। पिता को गलत जानकारी देकर पेपर साइन करवाएं। एजेंट सोविक कुंडू ने फोन तक उठाना बंद कर दिया। बड़ी कोशिशों के बाद सोविका कुंडू अस्पताल आया। एजेंट ने हाई बीपी से संबंधित दस्तावेज को कंपनी को देने से मना किया है।


रेलिगेयर ने पहरेदार को अपने जवाब में कहा कि जेपी केसरी और उनकी पत्नी के पॉलिसी से जुड़े सभी दस्तावेज कंपनी के पास है। प्री एग्जिटिंग डिजीज की जानकारी प्रपोजल फॉर्म में नहीं दी गई थी। कंपनी ने कहा कि 25 सितंबर 2017 को प्री- पॉलिसी मेडिकल चेकअप भी किया गया। जिसमें कंज्यूमर की मेडिकल हिस्ट्री के दस्तावेज थे। सभी दस्तावेजों पर कंज्यूमर और डॉक्टर के साइन हैं। पॉलिसी के कागजात कंज्यूमर के पोस्टल एड्रेस पर भेजे गए थे। पॉलिसी से जुड़े कागजातों को मधु केसरी ने प्राप्त किया। कंपनी को पॉलिसी से संबंधित गलती के बारे में सूचित नहीं किया।


कंपनी ने अपने जवाब में आगे कहा कि  पोर्टेबिलिटी फॉर्म या प्री पॉलिसी हेल्थ चेकअप रिपोर्ट में ग्राहक ने प्री एग्जिटिंग डिजीज की जानकारी साझा नहीं की। इन दस्तावेज के आधार पर क्लेम को खारिज किया गया।