उत्तर प्रदेश में लिफ्ट एंड एलिवेशन एक्ट मौजूद नहीं! -
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उत्तर प्रदेश में लिफ्ट एंड एलिवेशन एक्ट मौजूद नहीं!

प्रकाशित Sat, 12, 2018 पर 14:43  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अगर आप नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद या उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर की हाई राइज बिल्डिंग में रहते हैं या नौकरी करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। आप जिस लिफ्ट का इस्तेमाल करते हैं उसका इंस्पेक्शन हुआ है या नहीं ये कोई नहीं कह सकता क्योंकि यूपी में लिफ्ट एंड एलिवेशन एक्ट मौजूद ही नहीं है जो लिफ्ट से जुड़े किसी हादसे की जिम्मेदारी तय करता है।


गाजियाबाद के इंदिरापुरम में हाई राइज बिल्डिंग की छठीं मंजिल पर रहने वाली डिंपल बलवानी साल भर पहले लिफ्ट से चलना छोड़ चुकी हैं। अब बहुत जरूरत पड़ने पर ही लिफ्ट का इस्तेमाल करती हैं। क्योंकि गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश की ऊंची ऊंची इमारतों में लिफ्ट फंस जाने या टूट कर गिर जाने जैसे हादसों में कई लोग जख्मी हुए हैं और जानें भी गई हैं। हालांकि अब प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है।


अब लिफ्ट में सुरक्षा के क्या इंतजाम होने चाहिए ये भी जान लीजिए। लिफ्ट में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस यानि एआरडी सिस्टम होना चाहिए। इसके अलावा बजर, इंटरकॉम की सुविधा और सीसीटीवी कैमरा भी होना चाहिए।


फिलहाल उत्तर प्रदेश समेत कई ऐसे राज्य हैं जिनमें बिहार राजस्थान मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य भी शामिल है वहां पर लिफ्ट एंड एलिवेशन एक्ट मौजूद ही नहीं है ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो मेंटेनेंस कंपनी बिल्डर बड़ी ही आसानी से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं इस मामले में पीआईएल दाखिल चुकी है। लिफ्ट एंड एलिवेशन एक्ट लिफ्ट को लगाने, चलाने और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी तय करता है।


जिन राज्यों में कानून है वहां नियम तोड़ने पर 3 महीने की जेल और पचास हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। एक्ट के मुताबिक लिफ्ट इंस्पेक्टर को हर 3 महीने पर लिफ्ट का इंस्पेक्शन करना होता है और इसकी रिपोर्ट लिफ्ट में टंगी होनी चाहिए।