आवाज़ अड्डा: राजनीति में नैतिकता की चर्चा बेमानी! -
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आवाज़ अड्डा: राजनीति में नैतिकता की चर्चा बेमानी!

प्रकाशित Thu, 17, 2018 पर 08:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कर्नाटक के खंडित जनादेश के बाद सत्ता का जो खेल शुरू हुआ है वो अभी लंबा चलेगा। देश में ऐसी परिस्थितयां कई बार आई हैं लेकिन इस बार घटनाक्रम पर देश की नजर है क्योंकि कर्नाटक तो एक शुरुआत है। आगे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सेमीफाइनल और 2019 का फाइनल है। कर्नाटक के जनादेश के खास मायने तो हैं ही गवर्नर के फैसले का भी अनुवाद किया जाएगा। चाहे सरकार जेडीएस की बने या बीजेपी की, कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला का फैसला एक नजीर बनाएगा।


वोटों की गिनती पूरी होने से पहले दोनों तरफ से सरकार बनाने के दावे, चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ लड़ रहे कांग्रेस और जेडीएस का नतीजे आने से पहले एक हो जाना और दिल्ली से लेकर बंगलुरु तक की सियासी हलचल-कर्नाटक में कुर्सी की खींचतान का ये खेल उस लंबी सियासत की शुरूआत भर है जिसे कम से कम 2019 तक जाना है। फिलहाल दोनों तरफ से दावे ठोक दिए गए हैं, तलवारें खींच ली गई हैं और कांग्रेस और जेडीएस अपने विधायकों की रखवाली में लग गए हैं। विधायक दल का नेता चुने जाने और दावेदारी पेश करने के बाद बी एस येदियुरप्पा  को सरकार बनाने का न्योता मिल गया है। दूसरी तरफ बहुमत के दावे के साथ एच डी कुमारस्वामी मैदान में डटे हुए हैं। कर्नाटक में हाई वोल्टेज सियासी ड्रामा जारी है।


इस बीच बड़ा अपडेट ये है कि आज सुबह 9 बजे बी एस येदियुरप्पा शपथ ग्रहण करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने शपथग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि इस मामले की अगली सुनवाई कल फिर होगी। इससे पहले देर रात कर्नाटक के राज्‍यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता दिया था। बी एस येदियुरप्पा को सदन में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्‍त दिया है। कांग्रेस और जेडीएस ने राज्यपाल के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में रात 1.45 बजे से लेकर करीब 4.30 बजे तक बहस चली।


अब आने वाले दिनों में हमें कर्नाटक में सत्ता में हिस्सेदारी के लिए खरीद फरोख्त का खुला खेल देखने को मिलेगा और सबसे बड़ा सवाल क्या कर्नाटक के जनादेश ने देश की राजनीति को साफ संदेश के बजाए एक पहेली दे दी है?