आवाज़ अड्डा: रमजान में कोहराम, कैसे मिलेगी सुकुन भरी जिंदगी! -
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आवाज़ अड्डा: रमजान में कोहराम, कैसे मिलेगी सुकुन भरी जिंदगी!

प्रकाशित Wed, 06, 2018 पर 08:12  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कश्मीर में रमजान को देखते हुए एकतरफा सीजफायर का तीसरा हफ्ता चल रहा है और इसके फायदे पर सवाल भी उठने लगे हैं। शुरुआत के कुछ दिनों तक शांति के बाद आतंकवादियों के ग्रेनेड हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है, पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आई हैं और सीमा पार से गोलीबारी भी तेज हुई है। लेकिन सवाल सिर्फ सीजफायर का नहीं बल्कि कश्मीर को लेकर एक ठोस विजन की कमी का है। ऐसे में समाधान तो छोड़िए, शांति भी कैसे लौटेगी। आज की तारीख में ना तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार में आत्मविश्वास दिखता है और ना ही जमीन पर कोई ऐसा नेतृत्व दिखाई दे रहा है, जिसके बारे में कहा जा सके कि उसे कश्मीर के लोगों का विश्वास हासिल है।


महबूबा मुफ्ती की अपील पर कश्मीर में सरकार ने जो एकतरफा युद्धविराम किया था, वो अब उल्टा पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। 1 से 4 जून के बीच ग्यारह ग्रेनेड हमलों और पुलवामा और नौहट्टा में पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद अब सरकार भी ये सोचने पर मजबूर हो गई है कि ये युद्धविराम रमजान के बाद भी जारी रखा जाएगा या नहीं।


कश्मीर का एक वीडियो भी इन दिनों वायरल है, जिसमें प्रदर्शन के दौरान मारे गए युवक कैसर का एक रिश्तेदार हुर्रियत नेताओं को खरी खोटी सुना रहा है कि हुर्रियत नेता अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाते हैं और आम कश्मीरी बच्चों की लाश पर राजनीति करते हैं। गृह राज्य मंत्री मानते हैं कि वीडियो में जो दिख रहा है वो सच्चाई है, लेकिन सरकार की तरफ से नरम रवैये के बावजूद कश्मीर में पत्थरबाजी खत्म नहीं हो रही है।


प्रधानमंत्री भी बोल चुके हैं कि कश्मीर का समाधान बोली से निकलेगा, गोली से नहीं। लेकिन अभी समस्या ये है कि बातचीत करें तो किससे। ऊपर से सरकार के वार्ताकार पूर्व आईबी चीफ दिनेश्वर शर्मा ने कहा है कि जब तक तनाव कुछ कम नहीं होता, बातचीत नहीं की जा सकती। महबूबा मुफ्ती ने हाल में केंद्र सरकार से पाकिस्तान से बातचीत का रास्ता खोलने की अपील की थी। सीजफायर उल्लंघन रोकने के लिए दोनों तरफ के सैनिक अफसरों ने एक फ्लैग मीटिंग की भी है, लेकिन रक्षा मंत्री ने साफ किया है कि जब तक आतंकवाद नहीं रुकता, दोनों देशों के बीच बातचीत संभव नहीं है।


सवाल उठता है कि आखिर कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाकर बीजेपी ने 4 साल में क्या हासिल किया? पाकिस्तान का रवैया, आतंकवाद और अलगाववाद की समस्या जस की तस बनी हुई है, बीच-बीच में कुछ दिनों की शांति को छोड़ दें तो हालात सुधरने की जगह बिगड़ते दिखाई देते हैं। क्या इस बार कश्मीर में हालात कंट्रोल से बाहर है? और ऐसे में रमजान के दौरान एकतरफा युद्धविराम से हम क्या हासिल कर लेंगे?