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योर मनीः सही बीमा, सुरक्षित जीवन

प्रकाशित Wed, 06, 2018 पर 14:44  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

योर मनी का फोकस हैं इंश्योरेंस पर। इंश्योरेंस में केवल निवेश नहीं बल्कि सम अश्योर्ड देखना जरुरी है यानि आपके पास पर्याप्त कितनी कवरेज है। क्या हर चीज के लिए आपके पास पर्याप्त इंश्योरेंस है और कितना निवेश और इंश्योरेंस में कैसे संतुलन बनाया जा सकता है। इसी पर बात करने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं रूंगटा सिक्योरिटी के डायरेक्टर और सीएफपी हर्षवर्धन रूंगटा।


हर्षवर्धन रूंगटा का कहना है कि लाइफ इंश्योरेंस लेना बेहद जरुरी है। इससे अनहोनी होने पर आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त टर्म कवर लेना जरूरी है। देनदारी, खर्च और लक्ष्य के हिसाब से टर्म कवर लें। एजेंट या फाइनेंशियल प्लानर से बीमा खरीद सकते हैं। साथ ही आप इंश्योरेंस पॉलिसी ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। सालाना आय का 10-15 गुना का कवर लें।


क्रिटिकल इलनेस कवर पर बात करते हुए हर्षवर्धन रूंगटा ने कहा कि क्रिटिकल इलनेस का हॉस्पिटल बिल दिक्कत दे सकता है। इसमें कैंसर, हार्ट अटैक, किडनी फेल जैसी बीमारियों के लिए कवर मिलता है क्योंकि बीमारी के बाद रिकवरी के दौरान आर्थिक परेशानी की आशंका बढ़ जाती है। क्रिटिकल इलनेस होने पर एकमुश्त पे-आउट की सुविधा मिलती है। क्रिटिकल इलनेस कवर मेडिक्लेम से अलग होता है। 1-2 साल की कमाई के बराबर क्रिटिकल इलनेस का कवर लें।


जीवन बीमा में एक्सिडेंट की वजह से डिसेबिलिटी का कवर नहीं मिलता है। इसलिए पर्सनल एक्सिडेंट कवर लेना जरूरी है। एक्सिडेंट राइडर से पर्सनल एक्सिडेंट कवर लेना बेहतर होता है। हर्षवर्धन रूंगटा ने आगे कहा कि हॉस्पिटल खर्च के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी लें। बढ़ते मेडिकल खर्च के हिसाब से कवर लें। 5 लाख के सम इंश्योर्ड की बेस पॉलिसी लें और 20 लाख का सुपर टॉप-अप प्लान चुनें।


सही हेल्थ इंश्योरेंस चुनने के लिए अपने बजट और लाइफ स्टाइल के हिसाब से हेल्थ इश्योरेंस लें। निजी हेल्थ इंश्योरेंस और फैमिली फ्लोटर में कौन सा बेहतर है ये देखें। फैमिली फ्लोटर का कवर सस्ता होता है और प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों पर कैपिंग नहीं होती है। सोच-समझकर इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें। इंश्योरेंस पॉलिसी के पेपर को ध्यान से पढ़ें।


ध्यान रखें महंगाई के हिसाब से मेडिकल कवर चुनें। अपना मेडिकल कवर ध्यान से चुनें। भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर कवर लें। इंश्योरेंस की बारीकियों पर ध्यान भी जरुरी है। इंश्योरेंस लेते वक्त को-पेमेंट प्लान और सब लिमिट पर ध्यान दें। को-पेमेंट प्लान और सब लिमिट पर ध्यान दें। बाकी के क्लेम का भुगतान कंपनी करती है। कुछ बीमारियों पर सब लिमिट लागू होती है। कंपनी सब लिमिट में मेडिकल खर्च तय कर देती है। कंपनी और थर्ड पार्टी क्लेम पर ध्यान दें। थर्ड पार्टी क्लेम वाले विकल्प में पेमेंट में देरी हो सकती है।