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ऑडिटर्स के इस्तीफे, एक्शन में आई सरकार

प्रकाशित Thu, 07, 2018 पर 10:32  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कई कंपनियों से ऑडिटर्स के इस्तीफे के बाद अब सरकार कुछ सजग हो गई है। कॉरपोरेट मंत्रालय ने ऐसे सभी मामलों की जांच के आदेश दिए है। हम आपको बता दें कि पिछले दिनों मनपसंद बेवरेजेज, अटलांटा सहित कई कंपनियों के ऑडिटर्स ने नतीजों से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद इन शेयरों की जोरदार पिटाई हुई थी। अब कॉरपोरेट मंत्रालय ने ऐसे मामलों की जांच के आदेश दिए हैं।


ऑडिटर्स के अचानक इस्तीफे की 15 शिकायतें मिली हैं। एमसीए ने ऑडिटर्स से इस्तीफे पर और जानकारी मांगी है। इस साल 32 ऑडिटर्स ने लिस्टेड कंपनियों से इस्तीफा दिया है। जनवरी से मई के बीच ये सभी इस्तीफे दिए गए हैं। कई ऑडिटर्स ने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है।


हाल ही में मनपसंद बेवरेजेज और अटलांटा के ऑडिटर का इस्तीफा खबरों में रहा। 2 महीने पहले वक्रांगी के ऑडिटर ने इस्तीफा दिया था। गौरतलब है कि सेबी प्राइस वाटरहाउस पर प्रतिबंध लगा चुका है, वाटरहाउस पर सत्यम मामले में लापरवाही के बाद प्रतिबंध लगा है।


इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए कॉरपोरेट अफेयर्स सेक्रेटरी इंजेटी श्रीनिवास ने कहा कि देश में 10 लाख कंपनियां हैं उनमें से 30-32 कंपनियों के ऑडिटर्स ने इस्तीफा दिया है। कई बार ऑडिटर्स व्यक्तिगत और प्रोफेशनल कारणों से भी इस्तीफे देते हैं। ऑडिटर्स को इस्तीफे का कारण बताना अनिवार्य। ऑडिटर्स के इस्तीफों की घटना असामान्य है, इस्तीफों के मामले में जांच की जाएगी। जांच ऑडिटर्स की सफाई पर आधारित होगी। दोषी पाए जाने पर ऑडिटर्स पर कार्रवाई होगी। नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी के तहत ऐसे ऑडिटर्स पर पेनल्टी के साथ साथ 10 साल के लिए रोक भी लगाई जा सकती है।


उन्होंनें ने ये भी साफ किया कि जांच में अगर पाया गया कि कंपनी ने जानबूझकर निवेशकों को धोखा दिया है तो उसपर भी कड़ी कर्रवाई होगी। उस कंपनी के अधिकारियों को भी जिम्मेदार माना जाएगा।