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कंज्यूमर अड्डा: ऑटोमैटिक कार, बेहतर या बेकार!

प्रकाशित Tue, 12, 2018 पर 08:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

अब अपने देश में भी ऑटोमैटिक गाड़ियों का ट्रेंड तेज हो रहा है। गया वो जमाना जब कार में ऑटोमैटिक गियर को लक्जरी माना जाता था और महंगा भी। पिछले 5-6 साल में अलग-अलग कार कंपनियों ने ऑटोमैटिक कार की बिक्री में 28 गुना तक बढ़त दर्ज की है। होंडा की बिकने वाली कारों में 35 फीसदी तक ऑटोमैटिक गियर ट्रांसमिशन वाली कारें हैं। दुनिया भर में ऑटोमैटिक कारें ही ज्यादा बिकती हैं और अब ऑटो कंपनियां कह रही हैं कि भारत में भी यही होने वाला है। ऑटो कंपनियों के संगठन सियाम का भी मानना है कि ये ट्रेंड अभी और बढ़ने वाला है।


वजह ये है कि कारों के सबसे बड़े बाजार यानि मेट्रो शहरों की रेंगती हुई ट्रैफिक में बार बार गियर बदलना आपको थका देता है। अब महिलाएं भी खूब गाड़ियां चला रही हैं। इन महिलाओं और नौजवानों को ऑटोमैटिक गियर में सुविधा दिखती है। दूसरी तरफ कंपनियां भी सुधार कर रही हैं। ऑटोमैटिक मॉडलों के दाम कम हो रहे हैं और माइलेज भी बेहतर हो रही है।


लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आपको क्या करना चाहिए ऑटोमैटिक गाड़ी खरीदनी चाहिए या मैनुअल। ये बताने के लिए आज हमारे पैनल में तीन मेहमान शामिल हैं। ये हैं ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन, ऑटो सेक्टर की नामी मैगजीन मोटाउन इंडिया के एडिटर रॉय पी थरियन और ऑटो एक्सपर्ट बॉब रुपाणी।