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एग्जाम ऑन डिमांड की तैयारी में यूजीसी

प्रकाशित Wed, 13, 2018 पर 19:35  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

एग्जाम ऑन डिमांड यानि छात्र जब चाहे तब परीक्षा दे-चौंकिए नहीं, कुछ दिन में ये हकीकत बन सकता है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है और यूजीसी ने लोगों से भी इसपर सुझाव मांगे हैं।


यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन अब छात्रों को अपनी सुविधा के हिसाब से परीक्षा की तारीख तय करने की सुविधा पर विचार कर रहा है। वैसे दुनिया के कई देशों में एग्जाम ऑन डिमांड की व्यवस्था इस्तेमाल की जाती है, लेकिन भारत की उच्च शिक्षा में ये नया प्रयोग होगा। यूजीसी के इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार का भी समर्थन है। केन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह तो मानते हैं कि भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है और इसे आगे बढ़ाना चाहिए।


एग्जाम ऑन डिमांड की व्यवस्था में ना सिर्फ परीक्षा के तनाव को कम कर सकती है, बल्कि इससे छात्रों का समय भी बच सकता है। इसके तहत मेधावी छात्र 3 साल का कोर्स दो साल में भी पूरा कर पाएंगे। भारत में आईजीएनओयू और नेशनल स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग इस तरह की व्यवस्था देते हैं। शिक्षा जगत के लोग इसे एक अच्छी पहल बता रहे हैं।


यूजीसी इसके अलावा उच्च शिक्षा में सुधार के लिए और भी कई प्रस्तावों पर काम कर रहा है, जैसे - ग्रेड और क्रेडिट ट्रांसफर, टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल, स्पेशल कोर्सेज के लिए विशेष ट्रीटमेंट। इन तमाम विषयों पर आप भी यूजीसी को अपनी राय दे सकते हैं। कमीशन ने आम लोगों से 22 जून तक सुझाव देने को कहा है।