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सिंगल जीएसटी स्लैब लागू करना नहीं संभव, जीएसटी दरों में कटौती के संकेत

प्रकाशित Mon, 02, 2018 पर 08:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जीएसटी का एक साल का पूरा हो गया। कल इसका पहला बर्थ डे सरकार ने दिल्ली में जोरशोर से मनाया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर एक बड़ी बात कही। एक वेबसाइट स्वराज्य के साथ दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि देश में सिंगल जीएसटी स्लैब संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जीएसटी का एक स्लैब रखना सबसे आसान था लेकिन दूध और मर्सिडीज को एक ही रेट में रखना संभव नहीं है।


वहीं जीएसटी डे पर हुए खास कार्यक्रम को केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित किया। उन्होंने हालांकि इस बात के संकेत दिए हैं कि आगे टैक्स दरें कम की जा सकती हैं लेकिन साथ में ये भी कहा कि सिंगल स्लैब में जीएसटी लागू करना संभव नहीं है।


उधर वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी बड़ा गेम चेंजर साबित होगा। गोयल ने कहा कि छोटे कारोबारियों के लिए सालाना रिटर्न की व्यवस्था होनी चाहिए। टैक्स कलेक्शन बढ़ने से टैक्स दर कम करने की संभावना बढ़ती है। लेकिन भारत जैसे देश में अभी सिंगल स्लैब लाना मुश्किल है।


वित्त सचिव हसमुख अढिया को वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि हर महीने जीएसटी कलेक्शन 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये हो जाएगा। साल में जीएसटी कलेक्शन 13 लाख करोड़ होगा। अप्रैल, मई, जून हल्के महीने होते हैं। इस नजरिए से देखें तो मई में 94,000 करोड़ का आंकड़ा अच्छा रहा है। पीयूष गोयल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आते जाते रहेंगे। अगले साल भी यही सरकार जीएसटी के 2 साल का जश्न मनाएगी।


उधर वित्त सचिव हसमुख अढ़िया ने जून के जीएसटी कलेक्शन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य हर महीने जीएसटी कलेक्शन को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।


वहीं जीएसटी के बहाने सरकार की आलोचना भी हो रही है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीएसटी को लेकर सरकार की आलोचना की। चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने एक बड़ी योजना को बर्बाद करने का काम किया है। जीएसटी ने आम आदमी पर टैक्स का बोझ बढ़ाया है। सरकार ने जीएसटी जैसी बड़ी योजना को सबसे बुरे तरीके से लागू किया है। कारोबारियों के बीच जीएसटी आज सबसे बुरा शब्द बनकर रह गया है। सरकार कई खामियों के साथ जीएसटी लेकर आई। जीएसटी कारोबारियों, एक्सपोर्टर्स, ग्राहकों के लिए बुरा सपना बन गया है।


पी चिदंबरम के आरोपों पर पीयूष गोयल ने जवाब दिया। गोयल ने कहा कि चिदंबरम के लिए अंगूर खट्टे हैं। वहीं वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा है कि जीएसटी से देश में टैक्स प्रक्रिया सरल हुई और लोगों की जिंदगी आसान हुई है।


उधर सीआईआई के प्रेसिडेंट राकेश भारती मित्तल ने कहा कि अभी टैक्स स्लैब में राहत मिलना मुश्किल है। हालंकि टैक्स स्लैब में कटौती होनी चाहिए। पीएचडी चैम्बर्स के अध्यक्ष अनिल खेतान ने कहा कि टैक्स कलेक्शन बढ़ने से जीएसटी स्लैब घट सकते हैं। 1 लाख करोड़ रुपये के कलेक्शन से ये उम्मीद बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ 2 स्लैब होने चाहिए। सीमेंट, पेंट, फ्रिज पर टैक्स कम होना चाहिए। सरकार को कोई नया सेस नहीं लगाना चाहिए और एक्सपोर्ट पर जीएसटी नहीं होना चाहिए।


बीएसई के एमडी आशीष चौहान मानते हैं कि जीएसटी आने से टैक्स चोरी पर लगाम लगी है और अब टैक्स के दायरे में ज्यादा कारोबारी आ गए हैं। उन्होंने आगे कहा है कि जीएसटी के एक साल शानदार रहे हैं। जीएसटी से छोटे कारोबारियों का भी फायदा है।