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आवाज़ अड्डा: सोशल मीडिया या खतरा, लोग हो रहे हिंसक!

प्रकाशित Tue, 03, 2018 पर 08:09  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कौआ कान ले गया  हाथ लगाकर अपना कान नहीं देखा और बांस लेकर कौए के पीछे दौड़ पड़े। ये कहावत अब देश के अनेक हिस्सों में सच साबित हो रही है और बेहद खतरनाक अंदाज़ में। ऐसा लग रहा है कि मानों घर से निकलना ही खतरनाक हो गया है। चरैवेति चरैवेति के देश में अब किसी नए शहर, किसी नए गांव जाना जान से खेलने जैसा बनता जा रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों से ऐसी खबरें आम हो गई हैं कि भीड़ ने किसी न किसी अपराध के शक में लोगों को पकड़ा, घेरा और पीट-पीटकर मार डाला। ये संदेह पैदा कहां से होता है? इस सवाल के जवाब में सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा उंगुलियां उठती हैं। लेकिन भीड़ जो वहशीपन दिखा रही है क्या उसके लिए सोशल मीडिया ही जिम्मेदार है क्या ये कुछ और है।


अनजान लोगों पर भीड़ के हमले की खबरें समाज का भयानक चेहरा दिखा रही हैं। महाराष्ट्र के धुले जिले के राईनपाडा गांव में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में 5 लोगों को पीट-पीटकर मार डाला। सोशल मीडिया पर बच्चा चुराने वाले गिरोह के सक्रिय होने को लेकर अफवाहें फैल रही थीं जिस पर यकीन करके लोगों ने इस तरह की वारदात को अंजाम दिया। राज्य सरकार सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की जांच में जुट गई है।


बच्चा चोरी के आरोप में हत्या करने का ये पहला मामला नहीं है। हाल ही में असम के कार्बी आंगलॉन्ग जिले में भीड़ ने दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। दोनों युवक दोस्त थे और वहां घूमने गए थे। लेकिन भीड़ को शक था कि दोनों युवक बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोह के सदस्य हैं। जिस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, अफवाहें भी तेजी से फैल रही हैं।


पिछले एक साल में वॉट्सऐप पर बच्चा चोरी करने वाले गिरोह को लेकर फैली अफवाह की वजह से भीड़ के हमले की 13 घटनाएं घट चुकी हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, असम, त्रिपुरा, झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु में भीड़ के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। जिनमें 27 लोगों की मौत हो चुकी है।


सवाल है कि सोशल मीडिया जो संवाद का एक अच्छा माध्यम था वो अब एंटी सोशल होता जा रहा है? क्या सोशल मीडिया को कुछ शरारती तत्व अफवाह और झूठी खबर फैलाने के औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं जो गैर-जिम्मेदार लोगों के लिए हिंसा का हथियार बन जाता है? या एक समाज के तौर पर हम हिंसक होते जा रहे हैं, सोशल मीडिया सिर्फ एक बहाना है? इन्हीं सवालों पर आधारित है आवाज़ अड्डा की ये बड़ी चर्चा।