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आवाज़ अड्डा: जुआरी, सटोरिए बनेंगे बिजनेसमैन!

प्रकाशित Sat, 07, 2018 पर 14:08  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सट्टेबाजी और जुआ दो ऐसी बीमारियां हैं जिनका खुलेआम समर्थन करनेवाला आपको शायद ही कोई मिले। मगर आज एक दिन में तस्वीर बदली हुई दिख रही है। लॉ कमीशन ने सिफारिश कर दी है कि खेलों पर सट्टा या दांव लगाने यानी बेटिंग के कारोबार और जुए को खोल देना चाहिए। तर्क ये है कि ये सरकार के लिए लाखों करोड़ रुपये की कमाई का जरिया बन सकता है। लॉ कमीशन के मुताबिक सट्टेबाजी को रोकने की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं इसलिए क्रिकेट समेत अन्य खेलों में सट्टेबाजी और जुए की इजाजत दे देनी चाहिए। लेकिन सवाल ये है कि अगर सरकार सिफारिशें मान लेती है तो क्या जगह-जगह जुए के अड्डे नहीं खुल जाएंगे। क्या करोड़ों की कमाई के चक्कर में सामाजिक बुराई माने जाने वाले जुए और सट्टेबाजी को इजाजत मिलनी चाहिए?


तो क्या आने वाले दिनों में देश में जगह-जगह लोग कसीनो और पोकर खेलते हुए दिखेंगे। क्या क्रिकेट मैच में पड़ने वाले चौके और छक्कों पर लोग दांव लगाते हुए दिखेंगे क्योंकि लॉ कमीशन ने देश में जुआ और सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश कर दी है। लॉ कमीशन की राय में सट्टेबाजी पर प्रतिबंध नाकाम रहा है । इसलिए क्रिकेट समेत अन्य खेलों में सट्टेबाजी की इजाजत दे देनी चाहिए। कमीशन ने कहा है सरकार को सट्टेबाजी और जुए को रेगुलेट करके टैक्स के दायरे में लाना चाहिए। इसके लिए लॉ कमीशन ने पैन कार्ड और आधार के जरिए कैशलेस लेनदेन का सुझाव दिया है। इसके अलावा कानून में बदलाव करके कसीनो और ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में एफडीआई लाने की सिफारिश भी की है।


खेल जगत के जानकार लॉ कमीशन की सिफारिशों को अच्छा कदम बता रहे हैं। पूर्व क्रिकेटर मदन लाल का कहना है कि जो भी मैच लाइव चल रहा है उस पर सट्टा लग रहा है तो इससे बेहतर है इसे वैध कर दिया जाए जो भी मुनाफा हो उसे कमजोर स्पोर्ट्स संस्थाओं को देना चाहिए जैसे इंग्लैंड में है। उद्योग संगठन भी लॉ कमीशन की सिफारिशों का स्वागत कर रहे हैं। उनके मुताबिक इससे ना सिर्फ गैरकानूनी ढंग से सट्टेबाजी रुकेगी बल्कि सरकार की कमाई भी बढ़ेगी।


लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सट्टेबाजी की इजाजत मिलने से खेल तबाह हो जाएंगे। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि अगर खेलों में सट्टेबाजी की इजाजत मिलती है तो इससे ना सिर्फ खेलों को नुकसान पहुंचेगा बल्कि देश में पान की दुकानें जुए का अड्डा बन जाएंगी। लेकिन इस पर कानून के जानकारों की राय बंटी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एन संतोष हेगड़े सट्टेबाजी के साथ वेश्यावृत्ति को भी कानूनी मान्यता देने की वकालत कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ जानकारों को लॉ कमीशन की रिपोर्ट में विरोधाभास दिख रहा है।


फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक देश में गैरकानूनी सट्टेबाजी का बाजार करीब 3 लाख करोड़ रुपये का है। अनुमान के मुताबिक एक वन-डे मैच के दौरान करीब 1500 करोड़ रुपये का सट्टा लगता है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में सट्टेबाजी की इजाजत है। जानकारों का मानना है कि सट्टेबाजी की इजाजत से आपराधिक गतिविधियों में लगने वाली रकम को रोका जा सकेगा। लॉ कमीशन जो केस बना रहा है क्या उसके बाद जुआ और सट्टेबाजी की इजाजत दे देनी चाहिए? एक दलील ये है कि चोरी छिपे ये सब हो रहा है इसलिए अगर कानूनी मान्यता मिल जाएगी तो सरकारी खजाना भी भरेगा। लेकिन मामला क्या टैक्स चोरी और टैक्स उगाही का है? समाज को इसका फायदा होगा या नुकसान, इसका हिसाब लगाने की जिम्मेदारी किसकी है, क्या कोई इस पर भी गौर कर रहा है? आवाज़ अड्डा में इन्हीं सवालों पर हो रही है बड़ी बहस।