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सरकार के 70 लाख रोजगार के दावे पर सवाल

प्रकाशित Sat, 07, 2018 पर 15:01  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

पिछले साल संगठित क्षेत्र में 40 लाख नए रोजगार के दावे पर सवाल उठ गए हैं। केंद्र सरकार ने ईपीएफओ के जिस डाटा के आधार पर ये दावा किया गया था अब उसी डाटा में रोजगार में गिरावट दिख रही है और विपक्ष अब सरकार के दावे पर सवाल खड़े कर रहा है। बता दें कि हाल ही में मोदी सरकार ने दावा किया था कि पिछले एक साल में 70 लाख नए रोजगार पैदा हुए। ये दावा नीति आयोग की एक स्टडी में सामने आए थे जिसे आईआईएम बेंगलुरु के प्रोफेसर पुलक घोष और एसबीआई के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्य कांति घोष ने तैयार किया था। इसमें 70 लाख में से 40 लाख नौकरियों का आधार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के एनरॉलमेंट को बताया गया था।


लेकिन 25 जून को जारी ईपीएफओ के नए आंकड़े कुछ और कहानी बता रहे हैं। सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच पहले लगभग 40 लाख एनरॉलमेंट बताए गए थे जो कि अब घटकर करीब 28 लाख रह गए हैं। यानि पिछले आंकड़ों के मुकाबले हर महीने औसतन 12.5 फीसदी की गिरावट दिख रही है। अब सांख्यिकी एवं क्रियान्यवयन मंत्रालय ने ईपीएफओ से पूछा है कि इस गिरावट की वजह क्या है। ईपीएफओ में सेंन्ट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के मेंबर ब्रिजेश उपाध्याय का कहना है कि एनरोलमेंट के आंकड़ों मे उतार चढ़ाव होता रहता है।


इस पर एसबीआई के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्यकांति घोष का कहना है कि ईपीएफओ का डाटा लगातार बदलता है लेकिन कोई निष्कर्ष निकालते वक्त पूरे डाटा को देखा जाता है। मार्च में डाटा में जो बदलाव हुआ वो सबसे ज्यादा है।


लेकिन जिस तरीके से रोजगार के दावे को सरकार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब बनाकर पेश किया था उसी तरह अब विपक्ष सरकार के दावे पर सवाल खड़े कर रहा है। रोजगार एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है जिसमें आंकड़ों की कमी की वजह से आरोप-प्रत्यारोप की गुंजाइश रहती है। ऐसे में सरकार ने कहा था कि वो विश्वसनीय आंकड़ों की व्यवस्था बनाने को कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस स्टडी के आधार पर दावा किया उसमे ईपीएफओ के 8 करोड़ अकाउंट होल्डर्स से जुड़ी जानकारी जुटाने की बात कही गई थी लेकिन जब संगठित क्षेत्र के आंकड़ों में इस तरह की गड़बड़ी हो सकती है तो असंगठित क्षेत्र जहां कोई सटीक आंकड़ा नहीं है वहां बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होने का दावा अपने आप में एक बड़ा सवाल है।