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बड़े राज्यों में कम बारिश, एग्री की बिगड़ेगी चाल!

प्रकाशित Fri, 13, 2018 पर 16:47  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

सरकार खरीफ की एमएसपी का एलान कर चुकी है और मॉनसून सीजन के डेढ़ महीने खत्म होने के कगार पर हैं। लेकिन देश के छे बड़े राज्यों में बारिश बेहद कम हुई है। गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में अब तक 70 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि यूपी में कमी का ये आंकड़ा 50 फीसदी का है। बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा के किसान भी कम बारिश से परेशान है। ऐसे में सवाल ये है कि इसका कमोडिटी बाजार पर क्या असर होगा।


बात अगर खेती की है तो मौसम को समझना जरूरी है। क्योंकि देश में करीब 80 फीसदी खेती बारिश पर ही आधारित है। मतलब साफ है बारिश नहीं, तो खेती भी नहीं। आप लाख जतन कर लीजिए बिन बारिश कुछ नहीं कर सकेंगे और बारिश का आलाम ये है, कि देश के 6 बड़े राज्यों में समझ में नहीं आ रहा है, कि ये मॉनसून सीजन है? इनमें से चार राज्य ऐसे हैं जहां के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं।


गुजरात में वैसे बारिश जोर पकड़ने लगी है, लेकिन इसी राज्य का बड़ा हिस्सा जिसे सौराष्ट्र के नाम से जानते हैं। वहां इस सीजन अब तक 70 फीसदी कम बारिश हुई है। 1 जून से 12 जुलाई तक 38 फीसदी इलाकों में सामान्य बारिश हुई है। जबकि 28 फीसदी इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। लेकिन 34 फीसदी ऐसे इलाके हैं, जहां इस साल सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। ये बेहद डराने वाली तस्वीर हैं।


सौराष्ट्र में कपास और मूंगफली की खेती में भारी गिरावट देखने को मिली है। कपास, मूंगफली, कैस्टर, अरहर, धान और मक्के के मामले में पूरे हिदुस्तान की खेती में खास दमखम रखने वाले गुजरात की हालत खस्ता है। कम बारिश से कपास, मूंगफली और धान की खेती में भारी गिरावट आई है। अगर एक हफ्ते भी बारिश नहीं हुई तो सौराष्ट्र के किसान इस साल खेती से महरूम हो जाएंगे।


पूरे गुजरात में 15 जून तक एक दौर की बारिश हो जानी चाहिए। लेकिन एक जून से शुरू हुए मॉनसून सीजन में अब तक पूरे सौराष्ट्र में सामान्य से करीब 75 फीसदी कम बारिश हुई है। खेती का वक्त बितता जा रहा है। आप सोच सकते हैं किसानों पर क्या गुजरती होगी। सिर्फ कपास की खेती के लिए 3-4 इंच बारिश की जरूरत होती है। पिछले वर्ष 10 जुलाई तक गुजरात में 47 लाख 74 हजार हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। लेकिन इस साल 10 जुलाई तक महज 23 लाख 68 हजार हेक्टर में ही बुआई हो सकी है। यानि करीब 28 फीसदी कम। मूंगफली की खेती सबसे ज्यादा 60 फीसदी गिरकर 5.13 लाख हेक्टेयर में ही हो सकी है। वहीं कपास की खेती करीब 43 फीसदी गिर साढ़े 12 लाख हेक्टेयर के भी नीचे है। जबकि धान की खेती में करीब 35 फीसदी की गिरावट आई है।