वित्तीय स्थिरता पर ज्यादा जोरः प्रणव मुखर्जी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि फिलहाल उनका ज्यादा जोर वित्तीय स्थिरता पर है।
अपडेटेड Feb 28, 2011 पर 19:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

28 फरवरी 2011



सीएनबीसी आवाज़



वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी का कहना है कि बजट में वो और भी बेहतर कदम उठा सकते थे। लेकिन फिलहाल वित्त मंत्री का ज्यादा जोर वित्तीय स्थिरता पर है।



प्रणव मुखर्जी के मुताबिक जीएसटी को 1 अप्रैल 2012 तक लागू करने की कोशिश की जा रही है। राज्य सरकारों की मदद के बिना जीएसटी लागू करना काफी मुश्किल है। हालांकि फिलहाल सरकार का उधारी और वित्तीय स्थिरता पर ज्यादा जोर है। सरकार की जीएसटी में सेनवैट को शामिल करने की योजना है।



वहीं कच्चे तेल के दाम में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता पर फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है।



प्रणव मुखर्जी का मानना है कि डीजल डी-रेगुलेशन के लिए फिलहाल सही समय नहीं है। डीजल डी-रेगुलेशन के लिए कच्चे तेल में स्थिरता का इंतजार करना जरूरी है। वहीं केरोसिन में सब्सिडी का फैसला गरीब तबके के लिए लिया गया है।



वित्त मंत्री का कहना है कि पूरे विश्व में आर्थिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि इस परिस्थिति से निपटने के लिए नीतियों और गाइडलाइंस में बदलाव की जरूरत है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण बिल पर भी फैसला लेना बाकी है।



प्रणव मुखर्जी का मानना है कि साल 2050 तक भारत विश्व में बहुत आगे चला गया होगा और यहां से भारत को पछाड़ना दुनिया के लिए नामुमकिन हो जाएगा।



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