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उड़ानों के नियम जारी, शुरुआत में सिर्फ एक तिहाई उड़ानों को मंजूरी, कितना सुरक्षित है हवाई सफर!

25 मई से देश में फ्लाइट सर्विस होने जा रही है। शुरुआत में सिर्फ एक तिहाई उड़ानों को मंजूरी मिली है।
अपडेटेड May 22, 2020 पर 08:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

25 मई से देश में फ्लाइट सर्विस होने जा रही है। शुरुआत में सिर्फ एक तिहाई उड़ानों को मंजूरी मिली है। इसके साथ ही सरकार न्यूनतम और अधिकतम किराया तय करेगी। धीरे धीरे उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं, बीमारों को  हवाई सफर से बचने की सलाह दी गई है।  उड़ानों को शुरू करने के सामान्य प्रोसीजर के मुताबिक कोई  physical check-in नहीं होगा। सिर्फ कंफर्म web check-in वाले यात्रियों को ही यात्रा की अनुमति  होगी। उड़ान के लिए आरोग्य सेतु ऐप की आवश्यक्ता होगी। आरोग्य सेतु में रेड स्टेटस वाले यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यात्रियों को मास्क पहनना अनिवार्य होगा।  एयरलाइंस यात्रियों को खाना नहीं देंगी। सिर्फ एक चेक-इन बैग को अनुमति दी जाएगी। उड़ान में अखबार या पत्रिका नहीं दी जाएगी। यात्रियों को उड़ान से 2 घंटे पहले रिपोर्ट करना जरूरी होगा।


सिविल एविएशन मंत्री ने कहा है कि तीन महीने के लिए प्लेन का किराया एक रेंज के भीतर रहेगा। देश के सभी हवाई रूट्स को यात्रा के समय से हिसाब से 7 सेक्शन में बांटा गया है और इसी सेक्शन के आधार पर किराए का रेंज तय किया जाएगा। उदाहरण के लिए दिल्ली-मुंबई का किराया 3500 से 10000 रुपए के बीच होगा।


किराए के लिए सेक्शन


सेक्शन - 1 में 40 मिनट से कम की यात्रा
सेक्शन - 2 में 40 से 60 मिनट की यात्रा
सेक्शन - 3 में 60 से 90 मिनट की यात्रा
सेक्शन - 4 में 90 से 120 मिनट की यात्रा
सेक्शन - 5 में 120 से 150 मिनट की यात्रा
सेक्शन - 6 में 150 से 180 मिनट की यात्रा
सेक्शन - 7 में 180 से 210 मिनट की यात्रा


कितनी सुरक्षित है हवाई यात्रा


अब सवाल ये हैं कि कोरोना संकट काल में हवाई यात्रा कितनी सुरक्षित है और यात्रा के दौरान हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। अगर हम कोरोना संक्रमण के तकनीकी पक्ष को देखों तो साफ होता है कि इस वायरस का संक्रमण या तो रोगी के निकट संपर्क में आने से होता है या एयरो सोल के जरिए होता है। निकट संपर्क या चीजों को छूने से होने वाले संक्रमण से निपटने के लिए airlines को खास पैंसेजर टच प्वाइंट्स को ध्यान में रखते हुए अपने हवाई जहाजों को बार-बार सैनिटाइज करना होगा। हवाई जहाजों को अंदर और बाहर दोनों तरह से सैनिटाइज करना होगा।


हवा या एयरोसोल को जरिए होने वाले संक्रमण को ध्यान में रखते हुए देखें तो हवाई जहाजों में लगे air-cleaning systems अपने में पर्याप्त हैं। हवाई जहाजों के अंदर की हवा तीन कारणों से काफी साफ होती है। पहली वजह ये है कि जहाजों  की हर सीट पर ऊपर से नीचे की तरफ 1 मीटर प्रति सेकेंड के स्पीड से हवा आती है और हवा को जहाज की निचली सतह सोख लेती है। अगल-बगल से कोई हवा नहीं आती।


दूसरी खास बात ये है कि  हवाई जहाजों के अंदर की हवा हर 2-3 मिनट में पूरी तरह से रि-साइकिल्ड हो जाती है। हाई एल्टीट्यूड पर जहाज के अंदर खींची गई हवा ठंडी, सूखी और किसी तरह के संक्रमण से मुक्त होती है और इस हवा को भी बार-बार  रि-साइकिल किया जाता है।


और अंत में सबसे बड़ी बात ये कि हवाई जहाजों के अंदर की हवा को HEPA filters के जरिए साफ किया जाता है जिनकी हवा को साफ करने की क्षमता काफी ज्यादा और अच्छी मानी जाती है। HEPA filters हवा से 99.95 -99.99 फीसदी तक पार्टिकल्स साफ कर सकते हैं जिसमें COVID-19 के वायरस पार्टिकल्स भी शामिल हैं। इन कारणों से हवाई केबिन के अंदर की हवा काफी साफ और सुरक्षित होती है।




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