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आपके पोर्टफोलियो में सोने की अहमियत

गोल्ड फंड में एसआईपी के जरिए निवेश कर लंबे समय तक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल कर सकते हैं।
अपडेटेड Mar 25, 2011 पर 15:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

25 मार्च 2011



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भारतीय निवेशक सोने को अपने पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने में काफी हिचकते हैं। अक्सर हम सोने को सिर्फ आभूषण के तौर पर देखते हैं। देखा जाए तो सोने में इक्विटी और डेट जैसे निवेश विकल्पों की तरह निगेटिव रिटर्न की उम्मीद नहीं होती है, ऐसे में सोने को पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाना जरूरी है।



सोने की मांग में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सोने की खरीदारी के लिए ज्वेलरी सेक्टर, वित्तीय संस्थान, मैन्यूफैक्चरर्स और औद्योगिक उत्पादकों के अलावा सोने के सिक्कों और छड़ों का कारोबार करने वाले निवेशकों में होड़ मची हुई है। इसके अलावा सोने के वायदा कारोबार और ईटीएफ में कारोबार होने से निवेश में जोखिम कम हो रहा है।



अब तो साफ जाहिर होता है कि पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन के लिए सोने में निवेश करना कितना जरूरी है। इसके अलावा महंगाई के बढ़ने की सूरत में भी सोने से अच्छे रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है। सोने में जोखिम भी नहीं होता है। ज्यादातर देश, केंद्रीय बैंक और निजी निवेशकों को सोने में काफी भरोसा होता है। हालांकि मु्द्रा की कीमतों और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सोने पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं भारत में सोने की कीमतों पर आर्थिक उतार-चढ़ाव की बजाय कल्चर का प्रभाव ज्यादा होता है।



जिन निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना है वे ईटीएफ के जरिए निवेश कर सकते हैं। ईटीएफ में सोने में निवेश से स्टोरेज और अन्य लागत से बचत होती है। शेयर बाजार के जरिए ईटीएफ में निवेश होता है। वहीं रिलायंस म्युचुअल फंड और कोटक म्युचुअल फंड ने भी गोल्ड फंड लॉन्च किया है। आप गोल्ड फंड में एसआईपी के जरिए निवेश कर लंबे समय तक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल कर सकते हैं।



इस लेख के लेखक वाइजइंवेस्ट एडवाइजर्स के सीईओ हेमंत रुस्तगी है। हेमंत रुस्तगी से संपर्क के लिए hrustagi@yahoo.com पर ईमेल कर सकते हैं।