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कैसे करें क्रेडिट का सही प्रबंधन

प्रकाशित Sat, 23, 2011 पर 14:00  |  स्रोत : Moneycontrol.com

23 अप्रैल 2011

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जब हम बिजली का उपयोग करते हैं या फिर अपने टेलीफोन के बिल चुकाते हैं तो इसका मतलब है कि हम अपने क्रेडिट का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्रेडिट का मतलब है कि आप जिन सुविधाओं को इस्तेमाल कर रहे हैं उनके बिल का भुगतान बाद में कर रहे हैं।



क्रेडिट कार्ड के जरिए आप चीजें पहले खरीद सकते हैं और उनका भुगतान बाद में कर सकते हैं। हालांकि क्रेडिट कार्ड को इस्तेमाल करते हुए काफी सावधानी बरतने की जरूरत है।



क्रेडिट का सही और गलत उपयोग



अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए क्रेडिट कार्ड काफी बढ़िया साधन है लेकिन अगर असावधानी के साथ इस्तमाल किया जाए तो ये आपकी वित्तीय हालत को खराब कर सकता है। क्रेडिट कार्ड के जरिए सुविधाएं मिलती हैं और खरीदारी करना आसान हो जाता है लेकिन इससे अनावश्यक खर्च बढ़ता भी है और कुछ अन्य फालतू खर्चे भी साथ में जुड़ते हैं। अतः आप क्रेडिट कार्ड का उसी सूरत में इस्तेमाल करें अगर अतिरिक्त खर्चे की तुलना में ज्यादा सुविधाएं मिल रही हों।



मेडिकल खर्चों के भुगतान, पढ़ाई से जुड़ी जरुरतों के खर्चे और यात्रा के दौरान होने वाले खर्चों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी सुविधाजनक हो गया है। इन सभी आवश्यताओं के समय क्रेडिट कार्ड का प्रयोग आम हो गया है। हवाई उड़ानो के टिकट बुक करना, होटल, की बुकिंग आदि क्रेडिट कार्ड के जरिए कराना चुटकियों का काम बन गया है। हालांकि क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि हमें ऐसी चीजों की खरीदारी करने की आदत हो जाती है जिनकी हमें जरुरत नहीं पड़ती।



क्रेडिट कार्ड की लिमिट ज्यादा होने की वजह से लोगों को ज्यादा खर्च करने की आदत हो जाती है। क्रेडिट कार्ड की वजह से लोग कम से कम भुगतान करके बाद में रकम चुकाने की आदत डाल लेते हैं और ये देनदारी आगे चलकर काफी बड़ा रुप ले लेती है।



क्रेडिट क्षमता का प्रबंध कैसे करें



अच्छी क्रेडिट रेटिंग और क्रेडिट क्षमता का निर्माण करना काफी जरुरी होता है। ग्राहक को क्रेडिट भुगतान का इतिहास ठीक रखना चाहिए जिससे कि अगर भविष्य में जरूरत पड़े तो वो ज्यादा क्रेडिट हासिल कर सके।



ग्राहक को क्रेडिट कार्ड का अंधाधुंध इस्तेमाल करने से पहले सोचना चाहिए कि एक तरह से वह भविष्य की पूंजी को वर्तमान की छोटी-छोटी जरुरतों पर खर्च कर रहा है।  



बेंजामिन ग्राहम के कथन के मुताबिक एक समय में क्रेडिट उतना ही सच हो जाता है जितना कि जीवन और मृत्यु। इस कथन को ध्यान में रखते हुए यहां कुछ ऐसे टिप्स हाजिर हैं जिनके जरिए आप अपने क्रेडिट का प्रबंधन सही तरीके से कर पाएंगे।



काम में आने वाली कुछ उपयोगी टिप्स


•क्रेजिट बिल को सही समय पर चुकाएं, इन्हें आगे के लिए ना टालें

•अपने क्रेडिट स्कोर का बराबर ध्यान रखें,  अगर आपके क्रेडिट कार्ड बिल में कुछ गड़बड़ी या अतिरिक्त खर्चे दिखाए गए हैं, फौरन कार्ड जारी करने वाले बैंक से संपर्क करें।

•अपनी सभी ईएमआी को समय पर चुकता करें, इनमें थोड़ी सी भी देरी आपके क्रेडिट स्कोर को खराब कर सकती हैं।
•बहुत सारे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल ना करें

•क्रेडिट कार्ड को अंधाधुंध इस्तेमाल करने से बचें, बाद में बिल चुकता करने पर ऊंचा ब्याज देना पड़ता है।

•सिर्फ जीरो क्रेडिट होने और ईएमआई सस्ती होने के चलते अनावश्यक चीजें ना खरीदें तो बेहतर होगा।

•कोई भी कर्ज लेते समय डाउन पेमेंट को बढ़ाने की कोशिश करें, जिससे लोन लेने के बाद ईएमआई चुकाते समय आपकी मासिक बचत में कोई कमी ना आए।



अंत में सबसे अहम बात ये है कि क्रेडिट के जरिए आपकी खरीदने की शक्ति में बढ़त नहीं होती होती है। क्रेडिट के जरिए सिर्फ भविष्य की पूंजी को वर्तमान में इस्तेमाल करने की शक्ति मिलती है और आपको भ्रम हो जाता है कि आपकी खरीदने की क्षमता में बढ़ोतरी हो चुकी है।



यह लेख बैंक बाजार डॉटकॉम से लिया गया है। बैंक बाजार डॉटकॉम पर पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइल आवेदन कर सकते हैं।